अपराध
27 Jun, 2026

फर्जी सेल डीड से 18 करोड़ की बैंक ठगी का फरार आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने फर्जी सेल डीड, शेल कंपनियों और जाली पहचान के जरिए बैंकों से 18 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने वाले नौ साल से फरार घोषित आरोपी को गिरफ्तार किया है।

नई दिल्ली, 27 जून।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने फर्जी सेल डीड, जाली पहचान और शेल कंपनियों के माध्यम से बैंकों से 18 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने के मामले में नौ साल से फरार चल रहे घोषित अपराधी को गिरफ्तार किया है। आरोपित वर्ष 2017 से कानून की गिरफ्त से बाहर था और अदालत ने उसे उद्घोषित अपराधी घोषित कर रखा था। लगातार तकनीकी निगरानी और लंबी जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने उसे तिहाड़ जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपित की पहचान विज्ञान लोक निवासी 53 वर्षीय संजीव दीक्षित उर्फ संजय शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ दिल्ली, उत्तर प्रदेश और सीबीआई की विभिन्न इकाइयों में धोखाधड़ी, जालसाजी, भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश से जुड़े कुल 12 मामले दर्ज हैं। वह अपनी पहचान छिपाने के लिए 'संजीव गांधी' नाम का भी इस्तेमाल करता था।

पुलिस ने बताया कि वर्ष 2013 में विवेक विहार फेज-1 निवासी उषा रानी सेठी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि संजीव दीक्षित ने अपने साथियों के साथ मिलकर उनकी जानकारी और सहमति के बिना उनकी संपत्ति की 16 फरवरी 2013 की फर्जी सेल डीड तैयार करवाई। इसके लिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में शिकायतकर्ता के नाम की दूसरी महिला को प्रस्तुत किया गया और ओडिशा के भद्रक निवासी उसी नाम की महिला के पैन कार्ड का इस्तेमाल किया गया। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति अपने नाम दर्शाकर उसे गिरवी रखा गया और बैंकों से करोड़ों रुपये का ऋण लिया गया।

जांच में सामने आया कि आरोपितों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चाइनाट्रस्ट कमर्शियल बैंक, कनॉट प्लेस से 10 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा स्वीकृत कराई, जिसमें से 4.75 करोड़ रुपये जारी हुए। इसके अलावा 5 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट, 70 लाख रुपये का कार लोन तथा अन्य बैंकों से 3 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट भी हासिल की गई। बाद में सभी ऋण खाते एनपीए घोषित हो गए।

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने पहले अपने साथियों को शिकायतकर्ता की संपत्ति में किरायेदार बनवाया, जिससे संपत्ति और उसके दस्तावेजों से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल की जा सके। इसके बाद समान नाम वाले दूसरे व्यक्ति के पैन कार्ड का उपयोग कर फर्जी सेल डीड का पंजीकरण कराया गया। इसी आधार पर विभिन्न बैंकों से ऋण लिया गया। पुलिस के अनुसार बैंक से प्राप्त राशि को सीधे उपयोग करने के बजाय कई शेल कंपनियों और फर्जी बैंक खातों के जरिए स्थानांतरित किया गया, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके। बाद में रकम नकद निकालकर निजी खर्चों में इस्तेमाल की गई।

मामले की जांच के दौरान आरोपी को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन वह जांच में शामिल नहीं हुआ। लगातार फरार रहने पर चार जुलाई 2017 को अदालत ने संजीव दीक्षित और उसके साथी सचिन भारद्वाज को उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया। पुलिस टीम कई वर्षों तक विभिन्न राज्यों में उसकी तलाश करती रही, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया।

तकनीकी निगरानी और सत्यापन के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी किसी अन्य मामले में तिहाड़ जेल संख्या-7 में बंद है। इसके बाद कड़कड़डूमा कोर्ट से प्रोडक्शन वारंट प्राप्त किया गया। 25 जून 2026 को आरोपी को अदालत में पेश किए जाने के बाद ईओडब्ल्यू ने इस प्रकरण में उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार संजीव दीक्षित एक आदतन आर्थिक अपराधी है। उसके खिलाफ सीबीआई और दिल्ली, सोनीपत तथा उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़े 12 मामले दर्ज हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि वह फर्जी पहचान, जाली संपत्ति दस्तावेज, शेल कंपनियों और फर्जी बैंक खातों के माध्यम से बड़े पैमाने पर बैंक धोखाधड़ी को अंजाम देता था तथा अपनी पहचान छिपाने के लिए 'संजीव गांधी' नाम का इस्तेमाल करता था।

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