भोपाल, 27 जून।
डिजिटल युग ने जीवन को जितना सरल बनाया है, उतनी ही तेजी से नए खतरे भी सामने आए हैं। आज बैंकिंग, खरीदारी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी योजनाओं का बड़ा हिस्सा इंटरनेट आधारित हो चुका है। ऐसे में साइबर अपराध केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का भी बड़ा प्रश्न बन गया है। यही कारण है कि साइबर सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
हाल ही में राज्यव्यापी साइबर जागरूकता अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका संदेश स्पष्ट है कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या तकनीकी विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि आम लोग सतर्क और जागरूक होंगे तो साइबर अपराधियों की रणनीतियां स्वतः विफल हो सकती हैं।
आज साइबर अपराध के तरीके पहले की तुलना में अधिक जटिल हो चुके हैं। फर्जी लिंक, नकली वेबसाइट, डिजिटल गिरफ्तारी, ऑनलाइन निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, सोशल मीडिया हैकिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अपराधी लोगों की भावनाओं, भय और लालच का लाभ उठाकर उन्हें जाल में फंसाते हैं। कई बार पढ़े-लिखे और तकनीकी रूप से सक्षम लोग भी इनके शिकार बन जाते हैं।
साइबर सुरक्षा के तीन मूल सूत्र हैं—जागरूकता, सावधानी और सहभागिता। संदिग्ध संदेश, कॉल या लिंक पर बिना जांचे भरोसा न करें और किसी भी साइबर अपराध की तत्काल शिकायत करें। केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं। तकनीक के साथ अपराधियों के तरीके भी बदल रहे हैं, इसलिए स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों तक साइबर साक्षरता पहुंचाना समय की मांग है।
भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। डिजिटल भुगतान और ई-शासन का विस्तार तभी सुरक्षित रहेगा, जब नागरिक सतर्क रहेंगे। एक गलत क्लिक वर्षों की कमाई और निजी जानकारी को खतरे में डाल सकता है, जबकि थोड़ी-सी सावधानी बड़े नुकसान से बचा सकती है। सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल भारत का आधार जागरूक नागरिक ही हैं।













