नई दिल्ली, 29 जून।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) में अतिरिक्त 30,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के साथ एनआईआईएफ में केंद्र सरकार की कुल निवेश प्रतिबद्धता बढ़कर 60,000 करोड़ रुपये हो गई है। सरकार का मानना है कि इससे देश में अवसंरचना और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक निवेश जुटाने की क्षमता और मजबूत होगी।
नई स्वीकृत राशि का उपयोग परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, शहरी ढांचा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तथा राष्ट्रीय महत्व की अन्य परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने के लिए किया जाएगा। यह निवेश देश में उच्च गुणवत्ता वाली परिसंपत्तियों के विकास को गति देने में भी सहायक होगा।
भारत के संप्रभु निवेश मंच के रूप में स्थापित एनआईआईएफ का संचालन नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड (एनआईआईएफएल) करता है। इसमें भारत सरकार की 49 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी है। वर्तमान में यह मंच विभिन्न निवेश रणनीतियों के तहत लगभग 40,000 करोड़ रुपये की पूंजी प्रतिबद्धताओं का प्रबंधन कर रहा है तथा पोर्टफोलियो निवेश से बाहर निकलने के माध्यम से निवेशकों को लगभग 12,000 करोड़ रुपये लौटाए जा चुके हैं।
सरकार की नई निवेश प्रतिबद्धता का प्रमुख उद्देश्य एनआईआईएफ इंफ्रास्ट्रक्चर फंड-द्वितीय की स्थापना को समर्थन देना है, जो एनआईआईएफ के प्रमुख अवसंरचना कोष का अगला चरण होगा। प्रस्तावित फंड का लक्ष्य करीब 30,000 करोड़ रुपये का कोष तैयार करना है। इसके माध्यम से परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, शहरी परियोजनाओं और ई-मोबिलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा। इसके अलावा नई निवेश रणनीतियों तथा द्विपक्षीय एवं रणनीतिक निवेश कोषों को भी इससे सहयोग मिलेगा।
पिछले वर्षों में एनआईआईएफ ने वैश्विक संप्रभु संपत्ति कोषों, पेंशन फंडों, बहुपक्षीय विकास संस्थानों और घरेलू वित्तीय संस्थानों से निवेश आकर्षित किया है। इसके निवेशकों में अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, ऑस्ट्रेलियनसुपर, सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स, ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान, पीएसपी इन्वेस्टमेंट्स, टेमासेक, एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक, जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन, अमेरिकी इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन तथा भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी समूह और कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं।
वर्तमान में एनआईआईएफ चार निवेश मंचों के माध्यम से अवसंरचना, निजी बाजार, रणनीतिक अवसरों और भारत-जापान फंड का संचालन कर रहा है। इसके निवेश सड़क, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, हवाई अड्डे, नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली प्रसारण, स्मार्ट मीटरिंग, डिजिटल अवसंरचना, स्वास्थ्य, विनिर्माण, किफायती आवास, प्रौद्योगिकी, जलवायु आधारित परियोजनाओं और वेंचर कैपिटल जैसे क्षेत्रों तक फैले हुए हैं।
सरकार के अनुसार एनआईआईएफ के निवेश पीएम गतिशक्ति, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, फेम, पीएम ई-ड्राइव और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं जैसे प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अनुरूप हैं। निवेश के साथ-साथ एनआईआईएफ सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं, अवसंरचना वित्तपोषण और नए निवेश ढांचों पर केंद्र और राज्य सरकारों को रणनीतिक परामर्श भी उपलब्ध कराता है।
सरकार का कहना है कि अतिरिक्त निवेश प्रतिबद्धता से देश के अवसंरचना क्षेत्र में निजी और संस्थागत निवेश को और बढ़ावा मिलेगा। साथ ही रोजगार सृजन, उच्च गुणवत्ता वाली परिसंपत्तियों के विकास और अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
















