इस्लामाबाद, 29 जून।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान सरकार ने बिना वैध वीजा के देश में रह रहे अफगान नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 10 जुलाई से ऐसे सभी अफगान नागरिक, जिनके पास वैध वीजा नहीं होगा, उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाएगा। यह निर्णय अवैध विदेशियों की वापसी योजना की समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों के अनुरूप लागू किया जा रहा है।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में सभी प्रांतीय सरकारों, विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों तथा इस्लामाबाद प्रशासन को निर्वासन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी पाकिस्तान में रह रहे अफगान नागरिकों के मामलों में भी इसी नीति के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन, पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आवश्यक निर्देश जारी करने की बात कही गई है।
सरकार ने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि देश में बिना वैध वीजा रह रहे अफगान नागरिकों की संख्या, उनके खिलाफ की गई कार्रवाई और 11 जुलाई तक की स्थिति का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाए। यह जानकारी केंद्र सरकार को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि अभियान की प्रगति की समीक्षा की जा सके।
पाकिस्तान ने वर्ष 2023 में शुरू किए गए निर्वासन अभियान को पिछले वर्ष अप्रैल में दोबारा लागू किया था। उसी दौरान बड़ी संख्या में अफगान नागरिकों के निवास परमिट समाप्त कर दिए गए थे और स्पष्ट किया गया था कि निर्धारित समय तक देश नहीं छोड़ने वालों को गिरफ्तार किया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त ने 22 मई को विभिन्न देशों से अपील करते हुए कहा था कि अफगान शरणार्थियों और शरण लेने के इच्छुक लोगों को जबरन अफगानिस्तान भेजना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और शरणार्थी कानूनों के विपरीत है। उनके अनुसार बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और पुरुष ऐसे देशों से वापस भेजे जा रहे हैं जहां उन्होंने सुरक्षा की उम्मीद की थी, जिससे उन्हें गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार एजेंसी के अनुसार इस वर्ष की शुरुआत से अब तक लगभग 2 लाख 70 हजार अफगान नागरिकों को अफगानिस्तान लौटाया जा चुका है। इनमें अधिकांश लोग पाकिस्तान और ईरान से भेजे गए हैं, जबकि तुर्किए और ताजिकिस्तान से भी कुछ लोगों की वापसी हुई है। इससे पहले पिछले वर्ष ईरान से 12 लाख और पाकिस्तान से डेढ़ लाख से अधिक अफगान नागरिकों को वापस भेजा गया था।
संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा है कि महिलाओं, लड़कियों, पूर्व अफगान सरकार और सुरक्षा बलों से जुड़े लोगों, मीडिया कर्मियों, नागरिक समाज के सदस्यों तथा एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के लोगों के सामने मानवाधिकार उल्लंघन और प्रतिशोध का खतरा बना हुआ है। मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि जिन लोगों को गंभीर खतरा है, उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध अफगानिस्तान भेजना अंतरराष्ट्रीय कानून के नॉन-रिफाउलमेंट सिद्धांत का उल्लंघन है। उन्होंने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करते हुए अफगान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की वर्ष 2025 की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि जबरन वापस भेजे गए अफगान शरणार्थियों को तालिबान अधिकारियों की ओर से मनमानी गिरफ्तारी, हिरासत, यातना और दुर्व्यवहार जैसी गंभीर मानवाधिकार चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
















