भोपाल, 29 जून।
राजधानी के विभिन्न तालाबों में पिछले 48 घंटों के दौरान पांच लाख से अधिक मछलियों की मौत का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों में हलचल मच गई है। सबसे अधिक असर छोटा तालाब में देखा गया, जहां बड़ी संख्या में मृत मछलियां पानी की सतह और किनारों पर दिखाई दीं। दुर्गंध फैलने पर नगर निगम ने विशेष अभियान चलाकर मृत मछलियों को हटाने का कार्य शुरू किया।
प्रारंभिक स्तर पर नगर निगम का मानना है कि मानसून के दौरान तापमान में अचानक हुए बदलाव और पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर कम होने से यह स्थिति उत्पन्न हुई हो सकती है। दूसरी ओर पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पहली बारिश के साथ नालों के जरिए बड़ी मात्रा में सीवेज और जैविक कचरा तालाबों में पहुंचने से जल की गुणवत्ता प्रभावित हुई, जिससे ऑक्सीजन तेजी से कम हुई और बड़ी संख्या में मछलियां मर गईं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) ने तालाबों के पानी के नमूने एकत्र कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मछलियों की मौत के पीछे प्राकृतिक कारण जिम्मेदार हैं या प्रदूषण इसकी प्रमुख वजह है।
विशेषज्ञों के अनुसार शहर के करीब 28 नाले सीधे छोटे तालाब में गिरते हैं। इनमें बाणगंगा नाला, बरखेड़ी पातरा नाला, जहांगीराबाद नाला, कमला पार्क क्षेत्र का स्टॉर्म वाटर ड्रेन और गिन्नौरी क्षेत्र का ड्रेनेज प्रमुख हैं। इन नालों से लगातार सीवेज और दूषित पानी तालाब में पहुंचने से वर्षों से जल गुणवत्ता प्रभावित होती रही है।
उल्लेखनीय है कि राजधानी में करीब सात वर्ष पहले भी बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत की घटना सामने आई थी। इसके अलावा पिछले वर्ष शाहपुरा तालाब में भी सैकड़ों मृत मछलियां मिली थीं। हालांकि मानसून के दौरान इतनी बड़ी संख्या में मछलियों की मौत का यह अब तक का सबसे बड़ा मामला माना जा रहा है।
















