नई दिल्ली, 30 जून।
भारतीय रेलवे ने बिहार में मानसी-सहरसा रेलखंड के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है। 44.40 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड पर लगभग 499 करोड़ रुपये की लागत से कार्य किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य रेल लाइन की क्षमता बढ़ाना, परिचालन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और यात्री व माल परिवहन की बढ़ती जरूरतों को पूरा करना है।
रेल मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना पूर्व मध्य रेलवे के मानसी-सहरसा खंड पर लागू होगी, जो मानसी-सरायगढ़ रेल कॉरिडोर का हिस्सा है। वर्तमान में इस मार्ग पर एकल रेल लाइन है, जिस पर यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भी भारी दबाव बना रहता है।
इस रेल मार्ग पर दोनों दिशाओं में प्रतिदिन 24 जोड़ी यात्री ट्रेनें संचालित होती हैं। इसके अलावा गेहूं, मक्का, गिट्टी, उसना चावल, सीमेंट, उर्वरक, चावल, नमक, बालू, पत्थर और चीनी जैसी प्रमुख वस्तुओं का परिवहन भी इसी मार्ग से किया जाता है।
रेल मंत्रालय ने बताया कि मौजूदा रेल लाइन की क्षमता का उपयोग 108.11 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अनुमान है कि वर्ष 2028-29 तक यह बढ़कर 119.34 प्रतिशत हो जाएगा। ऐसे में बढ़ते दबाव को कम करने और परिचालन में लचीलापन लाने के लिए अतिरिक्त रेल अवसंरचना की आवश्यकता महसूस की गई।
दोहरीकरण परियोजना पूरी होने के बाद यात्री और मालगाड़ियों का संचालन अधिक सुचारु होगा। इससे परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी, ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आएगा और सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
मंत्रालय के अनुसार परियोजना पूरी होने पर हर वर्ष अतिरिक्त 17.64 लाख टन माल परिवहन की क्षमता विकसित होगी। इससे कृषि, निर्माण और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य क्षेत्रों की लॉजिस्टिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। भारतीय रेलवे ने कहा कि यह परियोजना उच्च घनत्व वाले रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने, बेहतर संपर्क और सुरक्षित एवं तेज परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में चल रहे प्रयासों का हिस्सा है।
















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