नई दिल्ली, 30 जून।
केंद्र सरकार ने खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) अधिनियम, 1956 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना, खादी एवं ग्राम उद्योगों का आधुनिकीकरण करना और संस्थागत व्यवस्था को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाना है।
सरकार के अनुसार प्रस्तावित संशोधनों के जरिए अधिनियम को बदलती आर्थिक परिस्थितियों और ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इससे समावेशी और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण उद्यमों को औपचारिक स्वरूप मिलेगा तथा देश और विदेश के बाजारों में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
प्रस्ताव में ग्रामीण क्षेत्र की परिभाषा को विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के अनुरूप संशोधित करने का प्रावधान है। इससे विभिन्न राष्ट्रीय ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा और अधिक क्षेत्रों तक इसका लाभ पहुंचेगा।
सरकार ने प्रत्येक कारीगर और श्रमिक के लिए निर्धारित पूंजी निवेश सीमा बढ़ाने का भी प्रस्ताव किया है। इसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम के तहत सूक्ष्म उद्यमों की निवेश सीमा के अनुरूप बनाया जाएगा, जिससे ग्राम उद्योगों को एमएसएमई क्षेत्र की विभिन्न सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
संशोधनों में ब्रांडिंग, निर्यात, नवाचार, मानकीकरण, डिजिटलीकरण और भौगोलिक संकेतक (जीआई) संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे खादी एवं ग्राम उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी और घरेलू तथा वैश्विक बाजारों में उनकी पहचान और पहुंच का विस्तार होगा।
प्रस्ताव के तहत आयोग की संरचना को भी अधिक समावेशी बनाने की योजना है। इसमें महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, केंद्र सरकार तथा महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगीकरण संस्थान के प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार को नए ग्राम उद्योगों को अधिसूचित करने का अधिकार भी मिलेगा।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय संशोधित प्रावधानों को केवीआईसी के क्षेत्रीय कार्यालयों, राज्य खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्डों, खादी संस्थानों, ग्राम उद्योग संस्थानों और उद्यमियों के मौजूदा नेटवर्क के माध्यम से लागू करेगा। इसके लिए कार्यशालाओं, सेमिनारों और जनजागरूकता कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इन संशोधनों से ग्रामीण रोजगार, उद्यमिता, नवाचार और मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन बदलावों के क्रियान्वयन के लिए कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और यह किसी नई योजना की शुरुआत नहीं, बल्कि मौजूदा अधिनियम को अधिक प्रभावी बनाने की पहल है।
















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