अंतरराष्ट्रीय संबंध
02 Jul, 2026

भारत-जापान में 16 समझौतों पर सहमति, एआई और ऊर्जा सहयोग को नई रफ्तार

भारत और जापान ने 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में आर्थिक सुरक्षा, एआई, ऊर्जा स्थिरता, प्रौद्योगिकी, निवेश और वैश्विक रणनीतिक सहयोग सहित 16 बिंदुओं पर सहमति जताई।

नई दिल्ली, 02 जुलाई।

भारत और जापान ने आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता, एआई, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने पर सहमति जताई है। गुरुवार को आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के बीच कुल 16 बिंदुओं पर सहमति बनी। इनमें आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त घोषणापत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग संबंधी संयुक्त वक्तव्य और ऊर्जा लचीलापन पर संयुक्त वक्तव्य भी शामिल हैं।

नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित शिखर वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने सनाए ताकाइची को अपनी 'छोटी बहन' कहकर संबोधित किया।

विदेश मंत्रालय के अनुसार वार्ता में व्यापार और निवेश, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियां, रक्षा सहयोग तथा जन-समुदाय के बीच संपर्क बढ़ाने सहित विभिन्न विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी दोनों पक्षों ने अपने विचार साझा किए। बैठक के दौरान द्विपक्षीय संबंधों की प्रमुख प्राथमिकताओं पर महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई।

दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त घोषणापत्र, एआई सहयोग पर संयुक्त वक्तव्य और ऊर्जा लचीलेपन से जुड़े संयुक्त वक्तव्य को अपनाया। साथ ही आर्थिक सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तथा अनुसंधान एवं विकास से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों और अन्य समझौतों के आदान-प्रदान का भी दोनों नेताओं ने अवलोकन किया। राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित होने वाली गतिविधियों की सूची पर भी दोनों पक्ष सहमत हुए।

संयुक्त वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगले दस वर्षों में जापान से 10 ट्रिलियन येन के निवेश को आकर्षित करने और भारत में कार्यरत जापानी कंपनियों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि बैठक से आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता तथा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के तीन प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण, तकनीक, नवाचार और जन-समुदाय के बीच संपर्क को मजबूत बनाने पर भी चर्चा की। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे आगे शांति, समृद्धि तथा स्थिरता बनाए रखने में दोनों देशों की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की भूमिका को दोहराया गया।

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने अन्य जी-4 देशों के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसमें स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार का समर्थन भी शामिल है, ताकि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी निंदा की, जिसमें पाकिस्तान से होने वाला सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है। उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी कड़ी निंदा व्यक्त की।

इसके अलावा दोनों प्रधानमंत्रियों ने पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने नौवहन और हवाई उड़ानों की स्वतंत्रता बनाए रखने तथा बल या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध दोहराया।

यात्रा के समापन पर प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया और अगले वर्ष होने वाले 17वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान आने का निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार कर लिया।

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