नई दिल्ली, 02 जुलाई।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने आयुष मंत्रालय और आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के सहयोग से गुरुवार को नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयुष क्षेत्र पर सरकारी-उद्योग विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम में 150 से अधिक सरकारी अधिकारियों, निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई, स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों ने भाग लेकर आयुष क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर चर्चा की।
बैठक में मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों, निर्यात, वैश्विक ब्रांडिंग, गुणवत्ता मानकों, डब्ल्यूएचओ-जीएमपी अनुपालन, आयुष गुणवत्ता चिह्न, वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, नवाचार, चिकित्सा मूल्य यात्रा और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने भारतीय आयुष उत्पादों और सेवाओं की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए कई सुझाव भी दिए।
आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष एवं सांसद डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की वैश्विक स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है और भारत समग्र स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने वैज्ञानिक प्रमाणन, गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूत करने के लिए सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।
वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि आयुष क्षेत्र तेजी से उभरता हुआ निर्यात क्षेत्र है। सरकार केवल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय आयुष ब्रांड विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। उन्होंने उद्योग जगत से नवाचार, गुणवत्ता, मूल्यवर्धन और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि भारतीय आयुष उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत बनाने के लिए आयुष चिह्न और आयुर्वेद आहार जैसी पहलों को प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योग से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग का लाभ उठाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित खुली चर्चा में निर्यातकों, एमएसएमई, स्टार्टअप और अन्य प्रतिनिधियों ने बाजार पहुंच, नियामकीय सुधार, कारोबार में सुगमता, नवाचार और वैश्विक सहयोग से जुड़े सुझाव दिए। इन सुझावों का उपयोग भविष्य की नीतियों और ब्रांड इंडिया आयुष को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में किया जाएगा।


















