भोपाल, 02 जुलाई।
महिला एवं बाल विकास विभाग तथा प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से आयोजित समर कैम्प 2026 के तहत गुरुवार को भोपाल जिले के सभी 73 सेक्टरों और 1,800 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में स्कूल रेडीनेस मेला-2 का सफल समापन हुआ। कार्यक्रम के दौरान 5 से 6 वर्ष आयु के हजारों बच्चों की सीखने की प्रगति का पुनर्मूल्यांकन किया गया।
अधिकारियों के अनुसार बच्चों का भाषा, संख्या ज्ञान, संज्ञानात्मक क्षमता, शारीरिक विकास और सामाजिक-भावनात्मक कौशल जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों में आकलन किया गया। 26 मई को आयोजित पहले मेले की तुलना में हुए सुधार को व्यक्तिगत रिपोर्ट कार्ड में दर्ज कर अभिभावकों को सौंपा गया।
एक माह तक चले माता सहभागिता कार्यक्रम के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बच्चों में स्पष्ट सुधार दर्ज होने की जानकारी दी। इस दौरान माताओं को 'एक खेल, एक कहानी, एक कविता' विषय पर प्रतिदिन व्हाट्सएप वीडियो भेजकर घर पर बच्चों के साथ सरल गतिविधियां कराने का मार्गदर्शन दिया गया।
मध्य भोपाल की एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि जिन बच्चों को पहले रंगों और अंकों की पहचान करने में कठिनाई होती थी, वे अब आत्मविश्वास के साथ गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय अभिभावकों, विशेषकर माताओं की सक्रिय भागीदारी को दिया।
मेले के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने चयनित केंद्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम में माताओं, सामुदायिक स्वयंसेवकों और स्थानीय विद्यालय प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही। उनका कहना था कि अब माताएं केवल जानकारी लेने वाली नहीं, बल्कि अपने बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
बरखेड़ी परियोजना अधिकारी हिबा खान, सुपरवाइजर चित्रलेखा तथा प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की ओर से कताल अहमद ने विभिन्न केंद्रों का भ्रमण कर बच्चों की गतिविधियों और रिपोर्ट कार्ड का अवलोकन किया। इस दौरान समर कैम्प के सफल संचालन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की गई।
प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन ने बताया कि सभी केंद्रों से प्राप्त रिपोर्ट कार्ड के आंकड़ों के आधार पर समर कैम्प 2026 की जिला स्तरीय समेकित रिपोर्ट तैयार की जाएगी। संस्था के राज्य प्रमुख सज्जन सिंह शेखावत ने कहा कि कार्यक्रम की वास्तविक सफलता परिवारों द्वारा पिछले एक महीने में बच्चों के साथ अपनाई गई नियमित सीखने की आदतों में दिखाई देती है।
अधिकारियों के अनुसार स्कूल रेडीनेस मेला-2 के समापन के बाद अब कक्षा-1 में प्रवेश लेने वाले बच्चों के सहज शैक्षणिक संक्रमण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कार्यक्रम के अनुभवों के आधार पर इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी विस्तार देने की संभावना पर विचार किया जाएगा।


















