राजनीति
02 Jul, 2026

पिच्छिका पर मेनका गांधी का दावा, पशु संरक्षण पर उठाए सवाल

भाजपा नेता मेनका गांधी ने पिच्छिका निर्माण को लेकर अपना दावा दोहराते हुए पशु संरक्षण, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर अपने विचार रखे।

नई दिल्ली, 02 जुलाई।

भारतीय जनता पार्टी की नेता मेनका गांधी ने गुरुवार को कहा कि धर्म के नाम पर पशु-पक्षियों के साथ किसी भी प्रकार का अत्याचार न तो उचित है और न ही कानून की दृष्टि से स्वीकार्य। उन्होंने अपने पुराने दावे को दोहराते हुए कहा कि पिच्छिका तैयार करने के लिए बड़ी संख्या में मोरों की हत्या की जाती है। उनके अनुसार इसके लिए लगभग 20 से 25 लाख मोर मारे जाते हैं, जिसे उन्होंने गलत बताया।

इंडियन वुमेन प्रेस कॉर्प में महिला पत्रकारों से बातचीत के दौरान मेनका गांधी ने कहा कि जैन मुनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छिका के लिए बड़ी संख्या में मोरों के पंख लिए जाते हैं। उनका कहना था कि मोर स्वाभाविक रूप से इतनी संख्या में पंख नहीं छोड़ते। उन्होंने यह भी कहा कि गिरे हुए पंखों से पिच्छिका तैयार किए जाने का दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता।

ग्रेट निकोबार विकास परियोजना और अन्य विकास कार्यों के दौरान पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि विकास का उद्देश्य लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए। यदि लोगों का जीवन बेहतर बन रहा है, तभी विकास को सही दिशा में माना जा सकता है।

आवारा कुत्तों की नसबंदी से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि कुत्तों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर छोड़ने से उनकी संख्या नहीं बढ़ती। उन्होंने जोर देकर कहा कि नसबंदी कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने की आवश्यकता है।

महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार रखते हुए मेनका गांधी ने कहा कि महिलाओं ने हमेशा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने जल स्रोतों का संरक्षण किया, आदिवासी और पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखा, जैव विविधता को बचाने में योगदान दिया और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित रखने का प्रयास किया। उनके अनुसार प्रकृति की रक्षा करना अंततः मानवता की सुरक्षा करना है।

उन्होंने पशु कल्याण को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ते हुए कहा कि जो समाज हर प्रकार के जीवन का सम्मान करता है, वह मानव गरिमा का भी सम्मान करता है। करुणा समाज को कमजोर नहीं, बल्कि अधिक संवेदनशील और मजबूत बनाती है।

मेनका गांधी ने कहा कि पर्यावरण, पशु और मनुष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार सामाजिक उत्तरदायित्व केवल दान या परोपकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का एक स्थायी दृष्टिकोण होना चाहिए।

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