सरकार व नीतियाँ
02 Jul, 2026

जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा, एनिमल टैक्सोनॉमी समिट संपन्न

कोलकाता में आयोजित एनिमल टैक्सोनॉमी समिट 2026 के समापन पर जैव विविधता संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरण नीति को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें और संस्थागत समझौते सामने आए।

कोलकाता, 02 जुलाई।

कोलकाता में प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण भारत (जेडएसआई) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय एनिमल टैक्सोनॉमी समिट 2026 का गुरुवार को समापन हो गया। 30 जून से शुरू हुए इस सम्मेलन का आयोजन जेडएसआई के 111वें स्थापना दिवस के अवसर पर किया गया। समापन समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर से 500 से अधिक वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान वर्गीकरण विज्ञान, जैव विविधता, प्राणी प्रणाली विज्ञान और वन्यजीव संरक्षण जैसे विषयों पर 10 तकनीकी सत्रों और पोस्टर प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। सम्मेलन में तैयार की गई सिफारिशों को भविष्य की पर्यावरण और संरक्षण नीतियों के लिए भारत सरकार को भेजा जाएगा।

समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री ने पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़े पांच महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रकाशनों का लोकार्पण किया। इनमें गोल्डन क्वाड्रिलेटरल राजमार्गों के आसपास की प्राणी विविधता, भारत के जीवाश्म जीवों का राष्ट्रीय संकलन, अंडमान-निकोबार के उष्णकटिबंधीय वनों और तटीय क्षेत्रों की डिप्टेरा प्रजातियों, प्रस्तावित अमरावती स्मार्ट सिटी क्षेत्र के वन्यजीव सर्वेक्षण तथा अंटार्कटिका के लार्सेमन हिल्स में भारत के पहले वैज्ञानिक अभियान पर आधारित अध्ययन शामिल हैं।

गोल्डन क्वाड्रिलेटरल से संबंधित अध्ययन में 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 2,359 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। वहीं भारत के जीवाश्म जीवों पर आधारित प्रकाशन में 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के एक अरब वर्ष से अधिक पुराने विकासक्रम का विवरण प्रस्तुत किया गया है।

अंडमान-निकोबार पर प्रकाशित अध्ययन में 47 वंशों और 18 कुलों की 101 मक्खी प्रजातियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें कई प्रजातियों का भारत में पहली बार रिकॉर्ड दर्ज हुआ। अमरावती क्षेत्र के अध्ययन में 500 वन्यजीव प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया, जिनमें पांच प्रजातियां संकटग्रस्त श्रेणी में मिलीं। वहीं अंटार्कटिका पर आधारित पुस्तक में भारत के 33वें वैज्ञानिक अभियान और वहां की सूक्ष्म जैव विविधता का विस्तृत विवरण शामिल है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया और जेडएसआई के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में शोध पूरा करने वाले 27 शोधार्थियों को बधाई दी।

सम्मेलन के दौरान जेडएसआई ने वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए चार महत्वपूर्ण संस्थागत समझौता ज्ञापनों का भी आदान-प्रदान किया। इसके तहत समुद्री जीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र, कल्याणी विश्वविद्यालय, सत्यभामा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान तथा मानव विज्ञान सर्वेक्षण भारत के साथ अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण, डीएनए अध्ययन, समुद्री पारिस्थितिकी और वैज्ञानिक संसाधनों के साझा उपयोग के क्षेत्र में सहयोग स्थापित किया गया। इन समझौतों से देश में जैव विविधता अनुसंधान और संरक्षण गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई गई।

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