जयपुर, 02 जुलाई।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शासन व्यवस्था में एआई अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता केवल तकनीक अपनाने में नहीं, बल्कि उसके विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग में है। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय हस्तक्षेप भी उतना ही आवश्यक रहेगा।
राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने सम्मेलन की सफलता पर आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी से यह आयोजन अधिक व्यापक बना है। सरकार लगातार अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से सुशासन को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कई अप्रासंगिक और पुराने कानून समाप्त कर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। मिशन कर्मयोगी और सीपीग्राम्स जैसे प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का ई-गवर्नेंस मॉडल अब वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुका है और कई देशों ने भारतीय प्रशासनिक नवाचारों को अपनाया है। उन्होंने राजस्थान को भी डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल बताया।
डॉ. सिंह ने राज्यों से भारत@2047 के दीर्घकालिक लक्ष्य के साथ-साथ अल्पकालिक और मापने योग्य लक्ष्यों पर भी ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने तेजी से बदलती तकनीक का उदाहरण देते हुए कहा कि वीसीआर और एसटीडी बूथ जैसी तकनीकें कुछ ही वर्षों में इतिहास बन गईं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में डिजिटल व्यवस्था के विस्तार के बीच प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी नए स्वरूप में विकसित होगी।
राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जिम्मेदार और समावेशी एआई की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार तकनीक का उद्देश्य केवल नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में मिले सुझावों और नवाचारों का अध्ययन कर उपयोगी मॉडलों को राज्य के विभिन्न जिलों में पायलट परियोजनाओं के रूप में लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि ई-गवर्नेंस अब केवल सिस्टम प्रबंधन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नई संभावनाओं को साकार करने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन में लगभग 200 विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और नवाचार साझा किए तथा करीब 100 डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी समाधानों का प्रदर्शन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से सरकार और नागरिकों के बीच की दूरी कम करना तथा पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था को मजबूत करना है।
प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार के लिए 1.65 लाख ग्राम पंचायतों से नामांकन प्राप्त हुए, जो गांवों तक नवाचार की बढ़ती पहुंच का प्रमाण हैं। कार्यक्रम में जयपुर डिक्लेरेशन जारी किया गया। साथ ही साइटेशन बुकलेट, एक्सीलेंस बुकलेट और कंपेंडियम का भी विमोचन किया गया। अंत में प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की अतिरिक्त सचिव सरिता चौहान ने सभी प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
गौरतलब है कि 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन का आयोजन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा राजस्थान सरकार ने संयुक्त रूप से किया। नैस्कॉम और एमएनआईटी जयपुर इस आयोजन के नॉलेज पार्टनर रहे।
सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के तहत सात श्रेणियों में कुल 17 परियोजनाओं और पहलों को सम्मानित किया गया। इनमें 10 स्वर्ण, छह रजत और एक जूरी पुरस्कार शामिल रहे। स्वर्ण पुरस्कार विभिन्न मंत्रालयों, संस्थानों और परियोजनाओं को प्रदान किए गए, जबकि रजत पुरस्कारों में महाराष्ट्र, पश्चिम त्रिपुरा, महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट की त्रिनेत्र एआई आधारित वीडियो निगरानी प्रणाली तथा अन्य परियोजनाओं को सम्मानित किया गया। सर्वे ऑफ इंडिया को जूरी पुरस्कार मिला। विजेताओं को ट्रॉफी, प्रशस्ति-पत्र तथा स्वर्ण पुरस्कार के लिए 10 लाख और रजत पुरस्कार के लिए पांच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।


















