नई दिल्ली, 02 जुलाई।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने पाकिस्तान के फारूकाबाद (मंडी चुहरकाना) में 125 वर्ष पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को बुलडोजर से गिराए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे केवल एक धार्मिक स्थल का ध्वस्तीकरण नहीं, बल्कि हिंदू-सिख समाज की आस्था, इतिहास और धार्मिक विरासत पर सुनियोजित हमला बताया। उनका कहना है कि यह गुरुद्वारा सिंह सभा आंदोलन की महत्वपूर्ण धरोहर था और प्रथम पातशाही श्री गुरु नानक देव जी से जुड़े गुरुद्वारा सच्चा सौदा साहिब के निकट स्थित था।
गुरुवार को मीडिया से बातचीत में तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान सरकार और प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही। उन्होंने कहा कि एक स्थानीय कारोबारी ने आवश्यक एनओसी के बिना गुरुद्वारा भवन को ध्वस्त कर दिया और हिंदू-सिख समुदाय के विरोध के बाद ही प्रशासन सक्रिय हुआ। उनके अनुसार जिस इमारत को पाकिस्तान सरकार पहले ऐतिहासिक स्मारक घोषित कर उसके ध्वस्तीकरण पर रोक लगा चुकी थी, उसी को भू-माफिया ने ध्वस्त कर दिया। उन्होंने इसे प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संरक्षण प्राप्त कार्रवाई बताया।
चुघ ने कहा कि यह घटना किसी एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों का एक लगातार सामने आता पैटर्न है। उन्होंने कहा कि इसी जून महीने में खैबर पख्तूनख्वा के मरदान में गुरुद्वारा की सेवा करने वाले सेवादार दंपती जगन्नाथ और आशा वंती की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा गुरुद्वारा कोहरियां, गुरुद्वारा श्री सिंह सभा, टेरी स्थित श्री परमहंस दयाल मंदिर और ल्यारी के 200 वर्ष पुराने हनुमान मंदिर जैसी घटनाओं का भी उन्होंने उल्लेख किया।
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यक आबादी 20 से 23 प्रतिशत के बीच थी, जो अब घटकर लगभग 3.5 प्रतिशत रह गई है। उनके अनुसार जबरन धर्मांतरण, हत्याएं और पलायन जैसी घटनाएं इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि 1950 के नेहरू-लियाकत समझौते में पाकिस्तान ने अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता, पूजा स्थलों की सुरक्षा और जीवन-संपत्ति की रक्षा का आश्वासन दिया था, लेकिन समय के साथ इन प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि भारत ने संविधान के माध्यम से अल्पसंख्यकों के अधिकारों को संरक्षण दिया है।
चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिंदू-सिख आस्था के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान में हिंदू-सिख समुदाय और उनके धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों पर उन्हें अपना स्पष्ट रुख देश के सामने रखना चाहिए।


















