रांची, 10 जुलाई।
झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के टीजीटी शिक्षकों के एक बड़े समूह को बड़ी राहत प्रदान की है। वर्ष 2016 की टीजीटी नियुक्ति परीक्षा में शामिल हुए शिक्षकों को, जो प्रशासनिक देरी के कारण 2019 के बजाय 2021 में नियुक्त हुए थे, अब समान वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभ प्राप्त होंगे। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकलपीठ ने अजय कुमार व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 12 सप्ताह के भीतर इस पर निर्णय लेने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत को अवगत कराया कि प्रशासनिक त्रुटि के कारण उनकी नियुक्ति में तीन साल का लंबा विलंब हुआ, जबकि उस दौरान नियुक्ति प्रक्रिया पर कोई न्यायिक रोक नहीं थी। वकीलों ने तर्क दिया कि यदि उन्हें वरिष्ठता का लाभ नहीं मिलता है, तो बिना किसी गलती के उन्हें अपने ही बैच के अन्य शिक्षकों से कनिष्ठ माना जाएगा, जो न्यायसंगत नहीं है। इस संदर्भ में उन्होंने पूर्व के विभिन्न अदालती फैसलों का भी हवाला दिया।
राज्य सरकार ने याचिका का विरोध किया, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ताओं को 2019 में नियुक्त समकक्ष शिक्षकों के अनुरूप ही वेतन वृद्धि, वरिष्ठता और अन्य वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएं। इन लाभों से पलामू, गढ़वा, हजारीबाग समेत राज्य के कई गैर-अनुसूचित जिलों के शिक्षक लाभान्वित होंगे।










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