भोपाल, 11 जुलाई।
द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने जोर देकर कहा है कि भारत की धार्मिक संस्थाएं करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक हैं। उन्होंने देश के मंदिरों की समुचित व्यवस्था के लिए एक सनातन बोर्ड के गठन का सुझाव दिया है।
शंकराचार्य का मानना है कि मंदिरों का संचालन सरकार के बजाय संतों, वेदविद् विद्वानों और योग्य व्यक्तियों के मार्गदर्शन में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों के लिए एक मार्गदर्शक धर्म-परिषद का होना अत्यंत हितकारी होगा, जो समय-समय पर मार्गदर्शन दे सके।
उनका कहना है कि सरकार के पास न तो शास्त्रीय ज्ञान है और न ही धार्मिक परंपराओं का अनुभव, इसलिए मंदिरों का धार्मिक नियंत्रण उसके पास नहीं होना चाहिए। सनातन धर्म संरक्षण समिति, यानी सनातन बोर्ड के माध्यम से ही मंदिरों का धार्मिक व्यवस्थापन किया जाना चाहिए।
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि मंदिरों में प्राप्त देवद्रव्य का उपयोग मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर गुरुकुलों, गौशालाओं, चिकित्सालयों और निर्धन सेवा जैसे लोककल्याणकारी कार्यों में होना चाहिए। यह दान की राशि भगवान का स्वरूप होती है, इसलिए इसका दुरुपयोग गंभीर अपराध है।
अयोध्या श्रीराम मंदिर मामले पर उन्होंने कहा कि दान के प्रबंधन में पारदर्शिता के लिए डिजिटल रिकॉर्ड, स्वतंत्र ऑडिट और नियमित सार्वजनिक विवरण अनिवार्य हैं। श्रीराम मंदिर की व्यवस्था ऐसी हो जो सभी के लिए आदर्श और अनुकरणीय बने।









