जोधपुर, 11 जुलाई।
उपभोक्ता संरक्षण के एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को बड़ा झटका देते हुए परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने जिला आयोग के उस निर्णय को पलट दिया है जिसमें सीटी स्कैन मशीन के क्लेम में 90 फीसदी अवमूल्य कटौती कर दी गई थी। अब बीमा कंपनी को परिवादी को 48 लाख 6,167 रुपये की कुल क्लेम राशि, 50 हजार रुपये का हर्जाना और 10 हजार रुपये वाद व्यय सहित भुगतान करने का आदेश दिया गया है। यह पूरी राशि 45 दिनों की समय सीमा के भीतर अदा करनी होगी।
मामले के अनुसार, होप डायग्नोस्टिक केयर की स्वामिनी संगीता देवी ने अधिवक्ता के माध्यम से राज्य आयोग में अपील दायर की थी। परिवादी का आरोप था कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी के साथ धोखाधड़ी से एक जाली और बनावटी पेज जोड़कर क्लेम में मनमानी कटौती की थी। जिला आयोग ने भी इसी जाली दस्तावेज को आधार बनाकर महज 3 लाख 6,710 रुपये का क्लेम मंजूर किया था, जिसे राज्य आयोग ने कानूनी और तथ्यात्मक भूल करार दिया है।
राज्य आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जिस विवादास्पद पेज का हवाला कंपनी दे रही थी, उस पर पॉलिसी नंबर तक अंकित नहीं था। इस कारण उसे पॉलिसी का वैध हिस्सा नहीं माना जा सकता। आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र कच्छवाहा, न्यायिक सदस्य अरुण कुमार अग्रवाल और सदस्य लियाकत अली की पीठ ने कंपनी की दलीलों को सारहीन मानते हुए उसे पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने यह भी माना कि बीमा कंपनी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही है कि नुकसान का जोखिम पॉलिसी के दायरे से बाहर था।
इस फैसले के साथ ही आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा दायर की गई अपील को भी खारिज कर दिया है। राज्य आयोग ने कंपनी को निर्देश दिए हैं कि वह तय समय सीमा के भीतर ब्याज सहित संपूर्ण क्लेम राशि और हर्जाना परिवादी को सौंपे। उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए यह एक बड़ी जीत मानी जा रही है, क्योंकि आयोग ने न केवल क्लेम राशि को बढ़ाया, बल्कि कंपनी की कपटपूर्ण कार्यप्रणाली पर भी कड़ी टिप्पणी की है।










