नई दिल्ली, 11 जुलाई।
भारत और अमेरिका के बीच होने वाले संभावित व्यापार समझौते और खेती से जुड़े मुद्दों पर देश में एक बार फिर बड़े आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने अब मोर्चा (एसकेएम) को पत्र लिखकर एकजुट होने का प्रस्ताव भेजा है।
पत्र में जगजीत सिंह डल्लेवाल और कुरुबुरु शांताकुमार ने कहा कि समय की मांग है कि आपसी मतभेद पीछे छोड़कर किसान हितों के लिए एक साथ आया जाए। संगठन ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष छेड़ने की अपील की है।
किसान नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार डब्ल्यूटीओ और बड़े कॉर्पोरेट घरानों के दबाव में किसान-विरोधी नीतियां बना रही है। अमेरिका के साथ होने वाले इस समझौते को खेती और छोटे व्यापारियों के लिए बड़ा खतरा बताया गया है।
संगठन ने पंजाब में लैंड पूलिंग नीति को दोबारा लाने की कवायद का भी कड़ा विरोध किया है। इन सभी चुनौतियों से निपटने के लिए चंडीगढ़ में पहले भी दो दौर की सकारात्मक बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें संयुक्त आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा की गई है।
एसकेएम के बड़े चेहरों जैसे राकेश टिकैत और दर्शन पाल के सामने अब यह नया प्रस्ताव है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि किसान संगठनों के ये दोनों खेमे भविष्य की रणनीति को लेकर क्या फैसला लेते हैं।









