संपादकीय
11 Jul, 2026

यात्राएं धर्म से ज्यादा राजनीतिक सिद्धि का मार्ग प्रशस्त करती हैं

दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित धर्म रक्षा यात्रा ने राजनीति, धर्म, सत्य और सार्वजनिक आचरण के बीच संतुलन को लेकर नई चर्चा को जन्म दिया है।

भोपाल, 11 जुलाई।

राजनीति और धर्म, दोनों में यात्राओं का बहुत महत्व रहा है। जन आक्रोश, जन आशीर्वाद, परिवर्तन और विकास यात्राएं चुनावी मौसम की पहचान बन चुकी हैं। आदि शंकराचार्य ने अल्पायु में पूरे देश का भ्रमण कर सनातन धर्म की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पीठों की स्थापना की। लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को भी गैर-राजनीतिक बताया गया था, लेकिन उसी यात्रा ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी। अब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से आहत होकर धर्म रक्षा के लिए गैर-राजनीतिक यात्रा का ऐलान किया है। उनका कहना है कि इस यात्रा में किसी दल का झंडा नहीं होगा, नेताओं को आमंत्रित नहीं किया जाएगा और इसका उद्देश्य केवल धर्म रक्षा का संदेश देना है।

यात्रा की घोषणा के साथ ही उन्होंने अपने सरकारी आवास के बाहर एक बैनर लगाया, जिस पर लिखा था कि इस बंगले में "चंदा चोरों का प्रवेश वर्जित है।" लेकिन सरकारी आवास जनता के धन से बना होता है। किसी को प्रवेश से रोकने वाला ऐसा संदेश राजनीतिक अधिक और धार्मिक कम प्रतीत होता है। जिन लोगों पर चंदे या दान में गड़बड़ी के आरोप हैं, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही अपराधी घोषित कर देना और उनके प्रवेश पर प्रतीकात्मक रोक लगाना धर्मसम्मत नहीं कहा जा सकता।

दिग्विजय सिंह का व्यक्तिगत जीवन सनातनी माना जाता है, लेकिन उनकी राजनीतिक छवि लंबे समय से मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति से जुड़ी रही है। हर पेशे का अपना धर्म होता है और राजनीति का भी एक धर्म है। सबसे बड़ा धर्म सत्य और इंसानियत है। किंतु राजनीति में पद, प्रतिष्ठा और संगठनात्मक मजबूरियां कई बार नेताओं को सच जानते हुए भी मौन रहने पर विवश कर देती हैं।

दिग्विजय सिंह कांग्रेस की कमजोरियों से भली-भांति परिचित हैं और उन्हें दूर करने की क्षमता भी रखते हैं। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व के सामने खुलकर बोलना उनके लिए संभव नहीं दिखता। जिस व्यक्ति की अपने दल से अपेक्षाएं बनी रहती हैं, उसके लिए हर परिस्थिति में सत्य पर अडिग रहना कठिन हो जाता है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जो व्यक्ति अपने राजनीतिक जीवन में हर बार सत्य के साथ खड़ा नहीं हो पाया, वह धर्म रक्षा के प्रश्न पर कितना निष्पक्ष रह सकेगा।

राम मंदिर में दान चोरी की घटना निस्संदेह निंदनीय है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति उस घटना के सहारे अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता या सार्वजनिक छवि को मजबूत करने का प्रयास करे, तो वह भी कम चिंताजनक नहीं है। धर्म मूलतः व्यक्ति के अंतर्मन का विषय है, किंतु आज उसका सार्वजनिक प्रदर्शन अधिक लाभ का माध्यम बनता जा रहा है। दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित यात्रा राजनीति से प्रेरित अधिक और धर्म रक्षा का माध्यम कम प्रतीत होती है। अंततः धर्म की रक्षा बाहरी प्रदर्शन से नहीं, बल्कि सत्य, करुणा, प्रेम और अपने कर्मों के प्रति ईमानदारी से होती है।

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आज का राशिफल

व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। शुभांक-4-6-8

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