जोधपुर, 22 जुलाई।
राजस्थान के मंडोर ओपन जेल में बुधवार को एक अनोखा विवाह समारोह आयोजित हुआ, जहां हत्या के अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो बंदी विवाह बंधन में बंध गए। दूल्हा मूलाराम और दुल्हन सीमा ने जेल परिसर में वरमाला पहनाकर सात फेरे लिए और नए जीवन की शुरुआत की।
ओपन जेल परिसर में आयोजित इस सादगीपूर्ण समारोह में कुल 21 बाराती शामिल हुए। इनमें जेल प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी मौजूद रहे। सभी ने नवदंपती को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मूलाराम नागौर जिले के अडसिंगा गांव का निवासी है। वर्ष 2017 में पड़ोसी युवक की हत्या के मामले में उसे दोषी ठहराया गया था और अगस्त 2023 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अच्छे आचरण के आधार पर उसे मंडोर ओपन जेल में स्थानांतरित किया गया, जहां वह पिछले दो वर्षों से रह रहा है।
सीमा मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली है। वर्ष 2016 में उसकी शादी जोधपुर निवासी कौशलराज अरोड़ा से हुई थी। पति की हत्या के मामले में उसे वर्ष 2019 में आजीवन कारावास की सजा मिली। अच्छे आचरण के कारण उसे भी बाद में ओपन जेल में स्थानांतरित किया गया।
ओपन जेल में रहने के दौरान दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आए और विवाह करने का निर्णय लिया। इसके लिए दोनों ने न्यायालय से अनुमति मांगी। राजस्थान हाई कोर्ट ने पुनर्वास और मानवाधिकारों के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विवाह की अनुमति देते हुए आवश्यक पैरोल प्रदान करने के निर्देश दिए।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद जेल प्रशासन ने विवाह की सभी तैयारियां पूरी कीं। ओपन जेल प्रभारी हापू राम की निगरानी में सुरक्षा और आयोजन की व्यवस्था की गई, जबकि सेंट्रल जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह शेखावत ने पूरे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग की। सीमा के परिवार से कोई सदस्य समारोह में नहीं पहुंच सका, इसलिए उसकी सहेली के पिता राधाकिशन वागेला ने कन्यादान की रस्म निभाई।











