नई दिल्ली, 22 जुलाई।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि टीम का उद्देश्य 51 वर्षों से जारी विश्व कप खिताब के इंतजार को समाप्त करना है। उन्होंने भरोसा जताया कि अनुभवी और युवा खिलाड़ियों के संतुलित संयोजन के दम पर भारतीय टीम विश्व कप में हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
बेल्जियम और नीदरलैंड की संयुक्त मेजबानी में 15 से 30 अगस्त तक एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 खेला जाएगा। भारत को पूल-डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स के साथ रखा गया है। भारतीय टीम 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी।
हरमनप्रीत सिंह दूसरी बार विश्व कप में भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे। इससे पहले भारत के एकमात्र विश्व कप विजेता कप्तान अजित पाल सिंह भी दो बार टीम का नेतृत्व कर चुके हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने 1971 में कांस्य और 1975 में अपना एकमात्र विश्व कप स्वर्ण पदक जीता था।
हरमनप्रीत ने कहा कि पेरिस ओलंपिक 2024 में लगातार दूसरा कांस्य पदक जीतने के बाद खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा है। प्रो लीग के अंतिम चरण में टीम के प्रदर्शन ने भी यह साबित किया कि भारतीय टीम लगातार बेहतर हो रही है। उन्होंने कहा कि तैयारियां अच्छी चल रही हैं और टीम पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में निरंतर अच्छा प्रदर्शन सबसे अहम होता है। हर मुकाबले में योजनाओं पर कायम रहना होगा और छोटी गलतियों से बचते हुए मिले हर मौके का पूरा फायदा उठाना जरूरी होगा।
टीम की सबसे बड़ी चुनौती पर उन्होंने कहा कि स्ट्राइकिंग सर्कल में आक्रामक और रक्षात्मक दोनों परिस्थितियों में प्रभावी प्रदर्शन करना बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।
उन्होंने कहा कि टीम का पूरा ध्यान इस बात पर है कि पेनल्टी कॉर्नर, गोल पर शॉट या अटैकिंग मूव जैसे हर अवसर का अधिकतम लाभ उठाया जाए।
अनुभवी और युवा खिलाड़ियों के संयोजन को लेकर हरमनप्रीत ने कहा कि टीम का संतुलन काफी अच्छा है। हाल के मुकाबलों में मजबूत टीमों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला है। अनुभवी खिलाड़ी युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और सभी का लक्ष्य विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।
कप्तानी के दबाव पर उन्होंने कहा कि बड़े टूर्नामेंट में टीम के लिए पदक जीतना हमेशा व्यक्तिगत उपलब्धियों से अधिक महत्वपूर्ण रहा है। 250 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलना गर्व की बात है, लेकिन टीम की सफलता ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है।
युवा खिलाड़ियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि बिना किसी दबाव के खुलकर खेलना चाहिए। गलती होने पर तुरंत उससे सीखकर टीम के लिए संघर्ष करते रहना जरूरी है। अभ्यास में की गई तैयारी ही मैच में नजर आती है।
भारत और पाकिस्तान एक ही पूल में हैं। पिछले 10 वर्षों में भारत पाकिस्तान से नहीं हारा है, लेकिन इस मुकाबले को लेकर हमेशा अलग उत्साह बना रहता है।
हरमनप्रीत ने कहा कि सभी इस मुकाबले का इंतजार कर रहे हैं और जीत की उम्मीद भी है, लेकिन टीम को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए समझदारी से खेलना होगा। उन्होंने कहा कि वेल्स, इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ तीनों मुकाबले समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। पहले मिनट से ही विपक्षी टीम पर दबाव बनाना और मिले मौकों को गोल में बदलना जरूरी होगा।
भारतीय कप्तान ने प्रशंसकों से समर्थन जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि टोक्यो ओलंपिक में 41 साल बाद पदक जीतकर टीम ने नई उम्मीद जगाई थी। अब विश्व कप जीते हुए 50 साल से अधिक समय हो चुका है और टीम इस लंबे इंतजार को खत्म कर नया इतिहास रचने के इरादे से उतरेगी। उन्होंने कहा कि प्रशंसकों का समर्थन बना रहे, टीम मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।











