सतना, 23 जुलाई।
सतना जिले में हृदयाघात के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार पिछले 15 महीनों में 157 लोगों की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अस्पताल में अब तक ईको जांच की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को आवश्यक जांच के लिए निजी संस्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के आईसीयू तथा पुरुष और महिला वार्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक प्रतिदिन औसतन चार से पांच हृदय रोगी भर्ती हो रहे हैं। वहीं हर दूसरे या तीसरे दिन हार्ट अटैक से एक मरीज की मौत दर्ज की जा रही है। वर्ष 2025-26 में 137 लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जून के बीच तीन महीनों में ही 19 मरीजों की जान जा चुकी है। इस तरह पिछले 15 महीनों में मृतकों की संख्या 157 तक पहुंच गई है, जिनमें कम उम्र के मरीज भी शामिल हैं।
हृदय रोगियों की लगातार बढ़ती संख्या के बावजूद जिला अस्पताल में ईको मशीन उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में मरीजों की जांच केवल ईसीजी के माध्यम से की जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि हृदय रोगों के सही आकलन और प्रभावी उपचार के लिए ईको जांच बेहद जरूरी होती है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार लंबे समय से ईको मशीन उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। पहले विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी को इसकी वजह माना जाता था, लेकिन मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एल.पी. सिंह की पदस्थापना के बाद यह समस्या दूर हो चुकी है। इसके बावजूद मशीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
जिला अस्पताल में टीएमटी मशीन तो मौजूद है, लेकिन वह कई वर्षों से बंद पड़ी है। इसके कारण मरीजों को टीएमटी और ईको जैसी महत्वपूर्ण जांचें निजी जांच केंद्रों पर करानी पड़ रही हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
अस्पताल में 25 बिस्तरों का आईसीयू और 10 वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध है। आईसीयू प्रभारी एवं कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एल.पी. सिंह ने बताया कि हृदय रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और गंभीर मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ईको मशीन उपलब्ध होना प्रभावी उपचार के लिए अत्यंत आवश्यक है।












