नई दिल्ली, 23 जुलाई।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक खास सुभाषित साझा करते हुए आत्मा और परम चेतना के बीच के गहरे आध्यात्मिक रिश्ते को बहुत ही सुंदर ढंग से समझाया है।
उन्होंने जो श्लोक शेयर किया है, उसके जरिए उन्होंने ब्रह्मांड और मानव शरीर के भीतर मौजूद दिव्य ऊर्जा की एकरूपता का बेहद गहरा संदेश दिया है।
इस सुभाषित का भाव यह है कि अंतरिक्ष में जो सर्वशक्तिमान और शाश्वत सत्य फैला हुआ है, वही असल में हर मनुष्य की आत्मा के भीतर भी पूरी तरह से विराजमान रहता है।
इसका अर्थ यह भी है कि जो कुछ इस सृष्टि के कण-कण और हर जीव के अंदर मौजूद है, वही ठीक उसी रूप में पूरे ब्रह्मांड में भी समाया हुआ है।











