काठमांडू, 23 जुलाई।
नेपाल ने बीते वित्तीय वर्ष में पहली बार पूरे 12 महीने बिजली निर्यात कर नया रिकॉर्ड बनाया। इस अवधि में भारत और बांग्लादेश को बिजली बेचकर 29 अरब 32 करोड़ 47 लाख रुपये की आय हुई। दूसरी ओर बिजली आयात पर 10 अरब 56 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस तरह देश को 18 अरब 76 करोड़ 50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला। घरेलू उत्पादन बढ़ने और मार्च-अप्रैल में अच्छी वर्षा होने से निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई और भारत से आयात कम रहा।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024/25 में बिजली व्यापार से 4 अरब 54 करोड़ 80 लाख रुपये का अधिशेष मिला था। अगले वित्तीय वर्ष 2025/26 में यह आंकड़ा लगभग चार गुना तक पहुंच गया। इस दौरान नेपाल ने भारत और बांग्लादेश को कुल 3 अरब 87 करोड़ 74 लाख 92 हजार यूनिट बिजली की आपूर्ति कर 29 अरब 32 करोड़ 47 लाख 43 हजार रुपये की कमाई की। यह आय वित्तीय वर्ष 2081/82 की तुलना में 67.84 प्रतिशत अधिक रही।
प्राधिकरण ने बताया कि वर्तमान में वर्षा ऋतु के दौरान भारत को 1,000 मेगावाट से अधिक और बांग्लादेश को 40 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जा रही है।
नेपाल की अधिकांश जलविद्युत परियोजनाएं रन-ऑफ-द-रिवर प्रणाली पर आधारित हैं। पहले आमतौर पर मई के अंत से दिसंबर के पहले सप्ताह तक ही बिजली निर्यात संभव होता था। पिछले वर्ष चैत और बैसाख में भी पर्याप्त वर्षा होने से बिजली उत्पादन बढ़ा और पूरे वर्ष निर्यात जारी रखा जा सका।
प्राधिकरण के अनुसार, नेपाल में हर वर्ष 500 से 600 मेगावाट नई उत्पादन क्षमता जुड़ रही है। घरेलू जरूरत पूरी होने के बाद बची हुई बिजली का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में भी इसके विस्तार की संभावना जताई गई है। प्राधिकरण का कहना है कि नई क्षमता बढ़ने के साथ निर्यात और उससे होने वाली आय दोनों में लगातार वृद्धि हो रही है।
नेपाल की अधिकतर जलविद्युत परियोजनाएं नदी के प्रवाह पर निर्भर हैं। मानसून में जलस्तर बढ़ने से बिजली उत्पादन अधिक होता है और इसी समय सबसे ज्यादा निर्यात किया जाता है। सर्दियों में जलस्तर घटने से उत्पादन कम हो जाता है, इसलिए घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए भारत से बिजली आयात करनी पड़ती है।










