लगभग दो वर्षों से एक ही जिले में पदस्थ एक साहब की नजर अब एक बड़े जिले पर है।
वे लगातार अपने बेहतर काम को उच्च स्तर तक पहुंचाने के भरसक प्रयास कर रहे हैं। साहब जहां जाना चाहते हैं, उस जिले के कुछ माननीयों से उनकी मुलाकात भी लगातार हो रही है। अब देखना यह है कि उनकी मुराद कब पूरी होती है।











