नई दिल्ली, 23 जुलाई।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने कहा कि भविष्य में इस संबंध में कोई भी फैसला व्यापक वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन तथा ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद ही लिया जाएगा। यह जानकारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
सरकार ने बताया कि ई85 ईंधन केवल विशेष रूप से डिजाइन और प्रमाणित फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए उपलब्ध कराया गया है। इसका अर्थ सामान्य पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की सीमा बढ़ाना नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि देश ने निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले ही 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। वर्ष 2022-23 में औसत मिश्रण लगभग 12 प्रतिशत, 2023-24 में 14.6 प्रतिशत, 2024-25 में 19.2 प्रतिशत और 2025-26 (नवंबर से जून) के दौरान 20 प्रतिशत रहा।
सरकार के अनुसार एथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है और ब्राजील सहित कई देशों में इसका लंबे समय से उपयोग हो रहा है। भारत में भी नीति आयोग, ऑटोमोबाइल निर्माता, तेल विपणन कंपनियां, एआरएआई, एसआईएएम और अन्य तकनीकी संस्थानों के सहयोग से वैज्ञानिक परीक्षणों और चरणबद्ध प्रक्रिया के बाद ई20 लागू किया गया।
सरकार ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों से ई15+ और ढाई वर्षों से अधिक समय से ई19-ई20 ईंधन का व्यापक उपयोग हो रहा है। देश में दो करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और तीन करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन ईंधनों पर चल रही हैं, लेकिन एथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन खराब होने, असामान्य घिसाव या वाहन की आयु कम होने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है।
सरकार ने यह भी बताया कि प्रमुख वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड में भी ई20 के कारण इंजन क्षति या अतिरिक्त घिसाव की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि कुछ पुराने ई10 डिजाइन वाले वाहनों में ईंधन दक्षता में तीन से पांच प्रतिशत तक कमी देखी जा सकती है, लेकिन ई20 बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, स्वच्छ दहन, एंटी-नॉकिंग क्षमता और इंजन के बेहतर प्रदर्शन में सहायक है।
सरकार के मुताबिक, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम से अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके अलावा लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात का विकल्प तैयार हुआ, करीब 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक लाभ मिला है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि ई0 या ई10 पेट्रोल पर लौटने का कोई प्रस्ताव नहीं है। साथ ही उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने टोल-फ्री नंबर, वेबसाइट, मोबाइल ऐप, सीआरएम सिस्टम, सोशल मीडिया, ईमेल और सीपीग्राम सहित विभिन्न माध्यमों से शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित की है।











