लंबे समय से मंत्रालय में एक ही विभाग में पदस्थ एक बड़े साहब को अपने एक छोटे, भरोसेमंद राजदार पर किया गया भरोसा अब भारी पड़ता नजर आ रहा है। साहब के प्रदेश छोड़ते ही भरोसेमंद साहब ने यू-टर्न लेते हुए उनके राज, उनके ही सहयोगियों को बताना शुरू कर दिया है।
चर्चाएं संपत्ति या आर्थिक निवेश तक होतीं तो भी ठीक था, लेकिन भरोसेमंद साहब ने तो सभी वैध-अवैध दस्तावेजों की फाइलें भी अपने पास रख ली हैं। यदि ये फाइलें बड़े साहब के विरोधियों के हाथ लग गईं, तो लेने के देने पड़ सकते हैं।











