राजगढ़, 25 जुलाई।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी युवराज दीक्षित की अदालत ने आठ वर्ष पुराने चाकूबाजी और मारपीट के मामले में चार आरोपितों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने सभी दोषियों को एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
उप संचालक अभियोजन आलोक श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में शासन की ओर से पैरवी कर रहे एडीपीओ राजेन्द्र सोनी ने शनिवार को बताया कि घटना 2 मई 2018 की रात करीब 9:30 बजे हुई थी। फरियादी मदनलाल अपने घर पर था। इसी दौरान भतीजी मनीषा के विवाह को लेकर पड़ोसी गोविंद को समझाने की बात पर विवाद हो गया। आरोप है कि चारों आरोपित गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर गोविंद ने लाठी से मदनलाल के सिर पर हमला कर दिया।
शोर सुनकर बीच-बचाव करने पहुंचे दिलीप पर आरोपित किशनलाल ने चाकू से हमला किया, जिससे उसके पेट के पास गंभीर चोट आई और अधिक रक्तस्राव हुआ। वहीं संतोष और सुनील ने भी फरियादी तथा अन्य लोगों के साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
ब्यावरा थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विवेचना के दौरान आरोपितों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने लाठी और चाकू जब्त कर मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर धारा 324 भी प्रकरण में जोड़ी। गवाहों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने सुनील, गोविंद, संतोष और किशनलाल को दोषी ठहराते हुए एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास तथा कुल 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। आठ वर्ष पुराने इस मामले में आए फैसले को पीड़ित पक्ष के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।















