नई दिल्ली, 25 जुलाई।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद सोनम वांगचुक और कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। विभिन्न नेताओं ने कहा कि छात्रों की आवाज आखिरकार सत्ता तक पहुंची और लंबे समय से चल रहा आंदोलन अपने मकसद तक पहुंचा।
जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान 26 दिन तक अनशन पर रहे सोनम वांगचुक ने एक्स पर लिखा कि यह लोकतंत्र की जीत है, जो सीधे सड़कों से निकली है। उन्होंने इसे शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत बताते हुए सीजेपी और देश की 'जेन जी' का आभार व्यक्त किया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश के छात्रों की आवाज आखिरकार सत्ता के दरवाजे तक पहुंच गई। उनके अनुसार, यह उन लाखों युवाओं की जीत है जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर देशभर में आवाज उठाई। उन्होंने इसे उन परिवारों की भी जीत बताया जिन्होंने अपने बच्चों को खोया और कहा कि सरकार को युवाओं से माफी मांगते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह उस पीढ़ी की जीत है जो लंबे समय से अन्यायपूर्ण और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष कर रही थी। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ विपक्ष की एकजुटता भी इस परिणाम का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि छात्रों का संघर्ष सफल हुआ और आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार नीट की व्यवस्था में सुधार करेगी, ताकि भविष्य में पेपर लीक की घटनाएं न हों और छात्रों को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह युवा शक्ति और छात्र शक्ति की जीत है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मुद्दे से शुरू हुआ यह संघर्ष अब रोजगार जैसे विषयों तक पहुंचेगा और भविष्य में हर गलती के लिए जवाबदेही तय होगी।















