नागदा, 25 जुलाई।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सड़क सुरक्षा और सड़क निर्माण में सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में दायर रिट याचिका का निराकरण करते हुए याचिकाकर्ता को जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की है। न्यायालय ने उन्हें संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की भी अनुमति दी है।
यह याचिका नागदा निवासी अभय चौपड़ा ने दायर की थी। उन्होंने सड़क निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों और तकनीकी प्रावधानों के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि इसी विषय से संबंधित एक मामला पहले दीवानी न्यायालय में भी प्रस्तुत किया जा चुका है, जिसका निराकरण हो चुका है।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में उठाया गया विषय व्यापक जनहित और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि इस प्रकार के मामले का परीक्षण जनहित याचिका के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
अदालत ने याचिकाकर्ता को 15 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अभ्यावेदन प्राप्त होने के बाद उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर विधि के अनुरूप शीघ्र निर्णय लेकर शिकायत का निराकरण करने का प्रयास करें।
हाईकोर्ट ने इन निर्देशों के साथ रिट याचिका का निस्तारण कर दिया। सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में इस आदेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।














