पूर्व मेदिनीपुर, 25 जुलाई।
सत्ता परिवर्तन के बाद से पश्चिम बंगाल के इस इलाके में तृणमूल कांग्रेस का संगठन गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है। पार्टी के कई कद्दावर नेता सलाखों के पीछे हैं तो तमाम लोग भूमिगत हो चुके हैं, जिसके चलते जमीन पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
चुनावी शिकस्त और भ्रष्टाचार के मामलों की मार झेल रही पार्टी आंतरिक कलह और गुटबाजी का भी शिकार हो चुकी है। हालात इतने नाज़ुक हैं कि कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और आपसी संपर्क साधने के लिए नेताओं को अब गुप्त बैठकों का सहारा लेना पड़ रहा है और पहचान छिपाने के लिए पार्टी का झंडा तक इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
वरिष्ठ नेताओं के कंधों पर संगठन को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी है, जो फोन और निजी मेल-मिलाप के जरिए कैडर को जोड़े रखने की कवायद कर रहे हैं। सार्वजनिक आयोजनों से दूरी बनाकर अब शादियों और सामाजिक अनुष्ठानों की आड़ में कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित किया जा रहा है।
आगामी दिनों में नई समितियों के गठन और सम्मेलनों की रूपरेखा तैयार की जा रही है ताकि बिखरे हुए कुनबे को फिर से एकजुट किया जा सके। पार्टी नेताओं का दावा है कि कार्यकर्ताओं पर बनाए जा रहे दबाव के कारण ही उन्हें गोपनीय रणनीति अपनानी पड़ रही है।
दूसरी तरफ, राजनीतिक गलियारों में विरोधी खेमे ने इस स्थिति पर तीखा कटाक्ष करते हुए बड़ा बयान दिया है। विपक्षी दल के नेताओं का कहना है कि आने वाले समय में इस सूबे से इस सियासी दल का पूरी तरह से सफाया तय है।















