पिछले दिनों एक माननीय के निजी कार्यक्रम में हुई गुलाबों की होली देखकर अच्छों-अच्छों को जलन होने लगी।
जिस तरह पूरे क्षेत्र में तीन-चार ट्रॉलियों भर गुलाबों से होली खेली गई, उससे कहीं न कहीं किसी न किसी को सादगी, दिखावे से दूरी और तड़क-भड़क से दूर रहकर राजनीति करने की सीख के खिलाफ संदेश जाता नजर आ रहा है।













