कोलकाता, 25 जुलाई।
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में एंटी स्नेक वेनम के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिसके तहत स्वास्थ्य विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी का खाका तैयार करना शुरू कर दिया है और हाल ही में इस सिलसिले में एक उच्चस्तरीय बैठक भी संपन्न हुई है।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, आजादी के बाद यह पहला मौका है जब सरकार ने इस जीवनरक्षक उत्पाद के मामले में सूबे को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की ठोस योजना बनाई है। स्थानीय स्तर पर पाए जाने वाले विषैले सांपों के जहर की प्रकृति दक्षिणी राज्यों के जीवों से भिन्न होती है, जिसके कारण बाहरी राज्यों से मंगाई गई दवा कई बार उतनी असरदार साबित नहीं हो पाती है।
भौगोलिक भिन्नता और जैविक संरचना के फर्क के चलते पश्चिम बंगाल की परिस्थितियों के अनुकूल वेनम तैयार करना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। वर्तमान समय में राज्य को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए दूरदराज के राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है और स्थानीय स्तर पर उत्पादन ठप होने से अक्सर संकट की स्थिति पैदा हो जाती है।
विधानसभा सत्र के दौरान ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए एक प्रमुख विधायक ने भी इस गंभीर मुद्दे पर जोर दिया और बताया कि देश में सांप के डसने से होने वाली कुल मौतों में अकेले बंगाल का अनुपात काफी अधिक है। रिपोर्ट का हवाला देते हुए सदन में यह बात सामने रखी गई कि बीते वर्ष देशभर में हजारों लोग इस दुर्घटना का शिकार हुए थे।
जनप्रतिनिधि की ओर से यह सुझाव भी रखा गया कि ऐतिहासिक संस्थान बंगाल केमिकल को यदि फिर से यह पुरानी जिम्मेदारी सौंप दी जाए, तो राज्य इस मेडिकल क्षेत्र में फिर से अग्रणी बन सकता है।
प्रशासन का मानना है कि यदि बंगाल के स्थानीय सांप के जहर के अनुरूप ही एंटीडोट का निर्माण शुरू कर दिया जाए, तो मरीजों के इलाज में चमत्कारिक सुधार देखने को मिलेगा और बहुमूल्य जीवन बचाने में मदद मिलेगी।















