विधानसभा सत्र में एक सवाल ऐसा आया कि विपक्ष से ज्यादा मुश्किल अपने ही खेमे से खड़ी हो गई। जवाब देने वाले माननीय के चेहरे के भाव बताते रहे कि तीर बाहर से नहीं, भीतर से चला है। आखिरकार बात को अलग कमरे की चर्चा तक ले जाकर सदन की गरिमा भी बची और राजनीतिक रिश्ते भी।

















