नई दिल्ली, 27 जुलाई।
राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सम्मान को कानूनी संरक्षण देने के उद्देश्य से संसद के निचले सदन में एक विधेयक प्रस्तुत किया गया है। सरकार का कहना है कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है। प्रस्तावित कानून के अनुसार सार्वजनिक रूप से वंदे मातरम् का अपमान करने, उसके गायन में बाधा डालने या जानबूझकर उसका उपहास उड़ाने पर तीन वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान होगा।
गृह राज्यमंत्री ने लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। अब तक राष्ट्रीय गान जन गण मन के सम्मान से संबंधित कानूनी प्रावधान मौजूद थे, लेकिन राष्ट्रीय गीत के लिए अलग कानून नहीं था। सरकार का तर्क है कि स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत ने देशवासियों को प्रेरित किया, इसलिए इसकी गरिमा की रक्षा आवश्यक है।
विधेयक को लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस भी शुरू हो गई है। कुछ सांसदों ने इसका स्वागत किया, कुछ ने अपमान की परिभाषा और संभावित दुरुपयोग पर सवाल उठाए। सरकार ने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य किसी को डराना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान को मजबूत करना है।
विधेयक में स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के गायन को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों को इसके इतिहास और महत्व से परिचित कराने का भी प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि कानून के साथ जनजागरूकता भी आवश्यक है।
वंदे मातरम्, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित, स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत रहा है। अब यह देखना होगा कि संसद में यह विधेयक किस स्वरूप में पारित होता है और व्यवहार में इसका प्रभाव कितना पड़ता है। किसी भी कानून की सफलता अंततः नागरिकों की जागरूकता और स्वैच्छिक सम्मान पर ही निर्भर करती है।
















