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संपादकीय
27 Jul, 2026

भोपाल और जबलपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स की नई उड़ान: 150 करोड़ के निवेश से बदलेगी तस्वीर

मध्य प्रदेश के भोपाल और जबलपुर में 150 करोड़ रुपये के निवेश से आईटी पार्क इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के बड़े हब के रूप में उभर रहे हैं।

भोपाल, 27 जुलाई।

मध्यप्रदेश अब आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। भोपाल और जबलपुर में बने आईटी पार्क अब केवल सॉफ्टवेयर के केंद्र नहीं रहे, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के बड़े हब के रूप में उभर रहे हैं। राज्य सरकार की नई नीति और निवेशकों के भरोसे के चलते यहां भोपाल में 18 और जबलपुर में 40 कंपनियों ने अपना कारोबार शुरू कर दिया है। इन कंपनियों ने मिलकर करीब 150 करोड़ रुपये का निवेश किया है और आने वाले समय में हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र में 204 एकड़ भूमि पर बना आईटी पार्क अब इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर के रूप में विकसित हो चुका है। यहां 50 एकड़ भूमि विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए आरक्षित की गई है, जिसमें अब तक 114 भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। इनमें से 48 कंपनियों ने अपना उत्पादन भी शुरू कर दिया है। जबलपुर में भी 88 कंपनियों को जमीन आवंटित की गई है और यहां 40 से अधिक भूखंडों पर निर्माण कार्य चल रहा है। पांच एकड़ क्षेत्र में एक लाख वर्गफुट का आईटी भवन बनकर तैयार है, जिसे 12 कंपनियों को किराये पर दिया जा चुका है। इनमें सरसटेक, ग्लोबल टेक्नोट्रस्ट और आरटेक जैसी कंपनियां शामिल हैं, जो सॉफ्टवेयर के साथ-साथ हार्डवेयर उत्पादन का कार्य भी कर रही हैं।

राज्य सरकार ने 2021-22 से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की थी और 2025 तक 1300 से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार देने का लक्ष्य रखा है। जबलपुर आईटी पार्क में 35 हजार वर्गफुट का नया भवन भी तैयार किया जा रहा है, ताकि और कंपनियों को स्थान मिल सके। भोपाल और जबलपुर, दोनों जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार ने विशेष फोकस किया है। बिजली, पानी, सड़क और इंटरनेट की सुविधा के साथ सुरक्षा तथा परिवहन व्यवस्था भी बेहतर की गई है।

इस पूरे बदलाव की नींव फरवरी 2027 में आईकॉमोस की रिपोर्ट के बाद रखी गई थी, जिसमें भोपाल को सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ तकनीकी विकास के लिए भी उपयुक्त बताया गया था। इसके बाद सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र और प्लग एंड प्ले मॉडल पर काम शुरू किया। मुख्यमंत्री ने भी घोषणा की थी कि मध्यप्रदेश को देश का अगला इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाया जाएगा और इसके लिए भोपाल, जबलपुर के साथ इंदौर और ग्वालियर को भी जोड़ा जाएगा।

निवेशकों का कहना है कि मध्यप्रदेश में जमीन की उपलब्धता, श्रमशक्ति और सरकारी सहयोग तीनों एक साथ मिल रहे हैं। यही कारण है कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु की कंपनियां भी यहां निवेश और विस्तार में रुचि दिखा रही हैं। कुछ कंपनियों ने पहले ही प्रोटोटाइप और असेंबली यूनिट शुरू कर दी हैं और अगले दो वर्षों में पूर्ण स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने की योजना है। इससे न केवल आईटी क्षेत्र को बल मिलेगा, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, मोबाइल कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर से जुड़े उद्योग भी यहां विकसित होंगे।

युवाओं के लिए यह सबसे बड़ी खुशखबरी है कि अब उन्हें रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। भोपाल और जबलपुर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जहां छात्रों को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार और निजी कंपनियों के बीच एमओयू भी हुए हैं, ताकि कैंपस प्लेसमेंट और इंटर्नशिप को बढ़ावा मिल सके।

चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी चुनौती कुशल मानव संसाधन की है, लेकिन सरकार ने इसके लिए आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों को अपग्रेड करने का निर्णय लिया है। दूसरी चुनौती वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ने की है। इसके लिए केंद्र सरकार की पीएलआई योजना का लाभ उठाया जा रहा है और निर्यात के लिए विशेष कॉरिडोर विकसित करने पर काम चल रहा है।

भोपाल और जबलपुर का यह नया अध्याय मध्यप्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है। 150 करोड़ रुपये का निवेश अभी केवल शुरुआत है। आने वाले पांच वर्षों में यह आंकड़ा कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। जब यहां निर्मित इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद देश के साथ-साथ विदेशों में भी पहुंचेंगे, तब मध्यप्रदेश को भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मानचित्र पर एक मजबूत पहचान मिलेगी।

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