भोपाल, 27 जुलाई।
मध्यप्रदेश में अब प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए बच निकलना आसान नहीं होगा। प्रश्नपत्र लीक करने वाले गिरोह, नकल माफिया और इम्पर्सोनेशन कराने वाले आरोपियों के मामलों की सुनवाई वर्षों तक लंबित नहीं रहेगी। राज्य में पहली बार चार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए गए हैं, जो ऐसे मामलों का फैसला तीन महीने के भीतर सुनाने का लक्ष्य लेकर काम करेंगे।
लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत उठाया गया यह कदम केवल दोषियों को सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने और युवाओं का भरोसा मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीशों की अदालतों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित किया है। इन अदालतों में पेपर लीक, नकल और इम्पर्सोनेशन से जुड़े मामलों की प्राथमिकता से सुनवाई होगी। निर्देश दिए गए हैं कि चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाए, ताकि वर्षों तक मुकदमे लंबित रहने की स्थिति समाप्त हो।
पिछले कुछ वर्षों में व्यापम से लेकर विभिन्न भर्ती परीक्षाओं तक प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा में नकल और दूसरे व्यक्ति से परीक्षा दिलाने जैसे मामलों ने लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास कमजोर किया है। सबसे अधिक नुकसान उन युवाओं को हुआ, जिन्होंने कठिन मेहनत से तैयारी की, लेकिन परीक्षा व्यवस्था की खामियों का खामियाजा भुगता।
नए कानून में दोषियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। प्रश्नपत्र लीक कराने वालों को दस वर्ष तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इम्पर्सोनेशन और नकल में सहयोग करने वालों पर भी कठोर कार्रवाई होगी। दोष सिद्ध होने पर सरकारी नौकरियों से प्रतिबंध जैसे प्रावधान भी लागू किए जा सकते हैं।
हालांकि, केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं होगा। पेपर लीक के मामले अब तकनीकी रूप ले चुके हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग ऐप, साइबर नेटवर्क और संगठित गिरोहों की भूमिका की प्रभावी जांच के लिए पुलिस और जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीक से लैस करना होगा। समय पर मजबूत चार्जशीट और ठोस साक्ष्य ही इन अदालतों की सफलता तय करेंगे।
यदि यह व्यवस्था प्रभावी साबित होती है तो इसका सबसे बड़ा लाभ युवाओं को मिलेगा। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, अभ्यर्थियों का विश्वास लौटेगा और भर्ती एजेंसियों पर भी निष्पक्ष एवं सुरक्षित परीक्षा कराने का दबाव बनेगा। समयबद्ध न्याय का यही संदेश अपराधियों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी होगा।
परीक्षा व्यवस्था किसी भी राज्य की प्रतिभा और भविष्य की नींव होती है। यदि इस व्यवस्था में सेंध लगती है तो सबसे बड़ा नुकसान योग्य और मेहनती युवाओं का होता है। ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट की यह पहल केवल कानूनी सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा और रोजगार व्यवस्था में विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
















