गुवाहाटी, 27 जुलाई।
असम राज्य में बाढ़ का पानी भले ही अब घटने लगा है, लेकिन आपदा प्रभावित क्षेत्रों की जमीनी हकीकत पूरी तरह बदल चुकी है। खेतों में लहलहाती फसलें तबाह हो चुकी हैं और मकानों, सड़कों तथा विद्यालयों में जमी मोटी गाद ने जनजीवन के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। सरकार तमाम उपाय करने के दावे कर रही है, परंतु विस्थापन और तबाही के इस मंजर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ की चपेट में आकर दो और लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिससे राज्य में इस आपदा से जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 68 तक पहुंच गया है। इसके अलावा धनसिरी नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे स्थिति की गंभीरता बनी हुई है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने जानकारी दी है कि विधानसभा सत्र की समाप्ति के बाद मंत्रिमंडल के सभी मंत्री प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर वहां के हालातों की खुद समीक्षा करेंगे। वर्तमान समय में कुल नौ जिले, जिनमें चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट, शिवसागर और डिब्रूगढ़ शामिल हैं, गंभीर रूप से प्रभावित हैं और सैकड़ों गांव पानी की चपेट में हैं।
आपदा से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा कुल 345 राहत शिविर और वितरण केंद्र बनाए गए हैं, जहां हजारों लोग शरण लिए हुए हैं और उन्हें आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है। इसके साथ ही पशुधन को भी भारी नुकसान हुआ है तथा हजारों मवेशी पानी में बह गए हैं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी भारी असर पड़ा है।
राहत और बचाव कार्यों में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस समेत कई सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैदी से जुटी हुई हैं। इसके अलावा प्रभावित इलाकों में चिकित्सा टीमें, नावें और हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं ताकि समय पर सहायता पहुंचाई जा सके और बुनियादी ढांचे की बहाली का कार्य तेज किया जा सके।















