लखनऊ, 03 अगस्त।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को प्रश्नकाल के बाद श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के दानपात्र से जुड़ी चोरी और कथित भ्रष्टाचार का प्रकरण जोरदार ढंग से गूंजा। समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने इस मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश किया, जिसके चलते सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य द्वारा इस पर जवाब देने के प्रयास के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी और वेल में आ गए। हंगामे के इस माहौल के बीच सभापति मानवेंद्र सिंह को सदन की कारवाही को पंद्रह मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।
विधान परिषद में नियम 105 के तहत अपनी बात रखते हुए विपक्ष के प्रमुख नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उनका तर्क था कि पवित्र दान सामग्री की चोरी होना और मामलों में केवल खानापूर्ति वाली कार्रवाई किया जाना बेहद गंभीर विषय है, जिससे जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
विपक्षी दलों का यह भी आरोप रहा कि श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के गठन में पारदर्शिता का अभाव है तथा निष्पक्ष जांच न होने के कारण चोरी की घटनाओं को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। उनका यह भी दावा रहा कि मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त हुई भारी-भरकम धनराशि और दान में अनियमितताएं बरती गई हैं, जिसे लेकर राजनीतिक गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है।
















