किसान आंदोलन के दौरान किसानों की उग्रता और आक्रामकता देखकर एक युवा अधिकारी कड़ी कार्रवाई करने के लिए आतुर नजर आ रहे थे।
पुलिसिया हथकंडे अपनाकर कुछ ही देर में आंदोलन समाप्त कराने की सोच रखने वाले साहब को धैर्य रखना और सिर्फ मूकदर्शक बनकर किसानों के उग्र आंदोलन को देखते रहना मंजूर नहीं था। इसलिए साहब ने घटनास्थल से रवाना होना ही उचित समझा।















