वाशिंगटन, 8 अगस्त।
अमेरिकी सीनेट में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान भारत और चीन पर प्रस्तावित 100 प्रतिशत शुल्क का विरोध किया गया। सांसद रॉब वायडेन और रैंड पॉल ने चेतावनी दी कि इस तरह का कदम अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचा सकता है और महत्वपूर्ण साझेदार देशों के साथ संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है।
रूस से संबंधित प्रतिबंध विधेयक को पिछले महीने अमेरिकी सीनेट में आगे बढ़ाया गया था। मौजूदा स्वरूप में यह कानून बनने पर रूस से ऊर्जा और अन्य वस्तुओं का आयात जारी रखने वाले देशों पर बड़ा आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। भारत भी संभावित रूप से प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है।
बहस के दौरान रैंड पॉल ने प्रस्तावित शुल्क को अमेरिका के लिए अपने ही हितों को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि इतने अधिक शुल्क लगाने से भारत के साथ अमेरिका के संबंध अस्थिर हो सकते हैं। रॉब वायडेन ने भी विधेयक में शामिल शुल्क संबंधी प्रावधानों का विरोध किया।
सीनेट ने 28 जुलाई को विधेयक को 86 के मुकाबले 12 मतों से आगे बढ़ाया था। इसका उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने के साथ भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी तथा अजरबैजान पर कड़े शुल्क का रास्ता खोलना है। विधेयक का लक्ष्य इन देशों की रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करना है।
भारत रूस से कच्चे तेल खरीदने वाला चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत की रूसी ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ी है। खाड़ी देशों से मिलने वाली करीब 40 प्रतिशत तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल को प्रमुख वैकल्पिक स्रोत के रूप में अपनाया है।















