बलिया, 8 अगस्त।
राजनीति के गलियारों में विधायक आते-जाते रहते हैं, किंतु कुछ ही चेहरे ऐसे होते हैं जो जनता के दिलों पर राज करते हैं। रसड़ा से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह ऐसे ही एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि थे, जिनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके चाहने वाले उन्हें महज़ एक राजनेता नहीं, बल्कि हर जरूरतमंद का सहारा और मसीहा मानते थे।
इलाके के लोग उन्हें गरीबों के मसीहा के रूप में याद करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके दरवाजे से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता था। चाहे इलाज के लिए आर्थिक सहायता की बात हो, बेटी की शादी का मामला हो या फिर क्षेत्रीय विकास की समस्याएं, वह हर जनसमस्या के समाधान के लिए सदैव तत्पर रहते थे।
एक स्थानीय बुजुर्ग ने नम आंखों से बताया कि नेता तो बहुत देखे, लेकिन उमाशंकर सिंह का अंदाज सबसे जुदा था। उनके सामने अपनी बात रखने में कभी किसी को संकोच नहीं होता था, क्योंकि वह जनता के लिए किसी अपने की तरह खड़े रहते थे।
विकास कार्यों की बात करें तो रसड़ा क्षेत्र में सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को अमलीजामा पहनाने में उनका अहम योगदान रहा है। बलिया जैसे पिछड़े क्षेत्र में शानदार सड़क नेटवर्क लाने का पूरा श्रेय उन्हीं को जाता है। सरकार चाहे जिसकी भी रही हो, उन्होंने हमेशा अपने संपर्कों के बूते बड़े विकास प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारा।
उनके निधन के बाद क्षेत्र में हर तरफ मायूसी छाई हुई है। अंतिम यात्रा के दौरान उमड़ी भीड़ इस बात की गवाही दे रही थी कि उन्होंने जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर जनता के दिलों में जो जगह बनाई थी, उसे भर पाना बेहद मुश्किल होगा।















