नई दिल्ली, 08 अगस्त।
आईएएफ विंग कमांडर हनी ट्रैप (IAF Wing Commander Honey Trap) केस में दिल्ली पुलिस की चार महीने की जांच के बाद कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, एक पाकिस्तानी हैंडलर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नंबर की लगातार एक भारतीय नंबर से बातचीत हो रही थी। यह नंबर भारतीय वायुसेना के एक विंग कमांडर का था।
जांच में दोनों के बीच निजी बातचीत का पता चला। पुलिस के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय नंबर से महिला बनकर अधिकारी को वीडियो कॉल के जरिए ब्लैकमेल किया गया। इसके बाद उस पर सैन्य ठिकाने की तस्वीरें, चल रहे शोध से जुड़े गोपनीय दस्तावेज और सैनिकों की आवाजाही की जानकारी साझा करने का दबाव बनाया गया।
पुलिस के अनुसार, अधिकारी को अपने वरिष्ठ सहयोगी के फोन में ऐसा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए भी कहा गया था, जिससे डिवाइस का डेटा हासिल किया जा सके। जांचकर्ताओं ने इसे स्पाइवेयर और रिमोट एक्सेस मालवेयर बताया है। इसके जरिए डेटा चोरी करने, लोकेशन ट्रैक करने और फोन पर होने वाली बातचीत रिकॉर्ड करने की क्षमता बताई गई।
दिल्ली पुलिस ने मामले की जानकारी वायुसेना को दी। इसके बाद विंग कमांडर की निगरानी शुरू की गई। 30 मई को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने उसे पकड़ा और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंप दिया।
अधिकारी पर राष्ट्रीय रक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज और वर्गीकृत जानकारी साझा करने के आरोप में आधिकारिक गोपनीयता कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसे न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया।
पुलिस के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद 30 जुलाई को सक्षम अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। मामला फिलहाल विचाराधीन है।















