गुवाहाटी, 8 अगस्त।
असम में आई भीषण बाढ़ का पानी कई इलाकों में धीरे-धीरे घटने लगा है, लेकिन हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट में जनजीवन पर बाढ़ का गंभीर असर पड़ा है। प्रभावित लोगों को पूरी तरह सामान्य स्थिति में लौटने में अभी समय लग सकता है। सरकार की ओर से नुकसान की भरपाई और राहत के प्रयास जारी रखने की बात कही गई है।
7 अगस्त को जारी आंकड़ों के अनुसार धनसिरि नदी नुमलीगढ़ और गोलाघाट क्षेत्र में तथा कुसियारा नदी श्रीभूमि क्षेत्र में अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इससे प्रभावित इलाकों में चिंता बनी हुई है। इसी बीच शुक्रवार को चराईदेव जिले से एक और शव बरामद हुआ। इसके साथ राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 97 हो गई है।
फिलहाल राज्य के 13 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें शिवसागर, गोलाघाट, नगांव, होजाई, शोणितपुर, धेमाजी, दरंग, बिश्वनाथ, कामरूप महानगर, लखीमपुर, उदालगुरी, जोरहाट और चराईदेव शामिल हैं।
इन जिलों के 33 राजस्व मंडलों के कुल 464 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। वर्तमान में कुल 1,55,849 लोग बाढ़ की स्थिति से प्रभावित हैं। इसके अलावा 10,748.64 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है।
राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए राहत व्यवस्था जारी रखी है। फिलहाल 55 राहत शिविर और 18 राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इस तरह कुल 73 राहत केंद्र सक्रिय हैं।
राहत शिविरों में 10,326 लोगों ने शरण ले रखी है। वहीं, राहत शिविरों में नहीं रहने वाले 6,881 लोगों को राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
चराईदेव जिले में शुक्रवार को एक और शव मिलने के बाद बाढ़ से राज्य में मृतकों की संख्या 97 हो गई है। बाढ़ का असर पशुओं पर भी पड़ा है। अब तक 47,879 पशु प्रभावित हुए हैं। इनमें 22,846 बड़े पशु, 18,083 छोटे पशु और 6,950 मुर्गी पालन से जुड़े पशु शामिल हैं।
7 अगस्त के आंकड़ों के अनुसार बाढ़ के पानी से 122 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें 120 मकान शिवसागर और दो मकान धेमाजी जिले के हैं। इसके अलावा शिवसागर में चार पक्के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।
आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे मकानों की संख्या 268 है। इनमें शिवसागर के 216, दरंग के 50 और धेमाजी के दो मकान शामिल हैं। शिवसागर में 76 पक्के मकानों को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है।
बाढ़ से शिवसागर जिले में 213 अन्य मवेशी शेड भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने का काम जारी है।
राहत और बचाव अभियान में एसडीआरएफ, सेना और अर्धसैनिक बल, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, वायुसेना, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, स्थानीय प्रशासन, नागरिक सुरक्षा और प्रशिक्षित स्वयंसेवक जुटे हुए हैं।
राज्य सरकार ने शुक्रवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों में 219 चिकित्सा दल तैनात किए। राहत कार्य के लिए आठ नावें भी लगाई गईं। इन नावों की मदद से 112 बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री के तौर पर 121.098 क्विंटल चावल, 22.413 क्विंटल दाल और 6.7329 क्विंटल नमक वितरित किया गया। इसके अलावा 477.37 लीटर सरसों का तेल भी उपलब्ध कराया गया।
पशुओं के लिए भी चारे की व्यवस्था की गई है। राहत सामग्री में 278.791 क्विंटल गेहूं का चोकर और 75.4 क्विंटल चावल का चोकर वितरित किया गया है।
बाढ़ से राज्य में सड़क, पुल और दूसरे बुनियादी ढांचे को भी बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा है। इनके पुनर्निर्माण और मरम्मत को लेकर सरकार लगातार समीक्षा कर रही है तथा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा और राज्य सरकार के कई मंत्री अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने और बाढ़ से हुए नुकसान के बाद स्थिति सामान्य करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।















