भोपाल, 10 अगस्त।
राजधानी में रविवार रात से सोमवार दोपहर तक हुई करीब सात इंच बारिश ने शहर में जलभराव की स्थिति पैदा कर दी। कुछ घंटों की तेज बारिश से 50 से अधिक इलाके प्रभावित हुए। निचले क्षेत्रों में घरों में पानी भर गया, सड़कें डूब गईं और कई स्थानों पर यातायात बाधित हुआ। हालात को देखते हुए नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया।
निशातपुरा के शिव नगर, गीता नगर और कल्याण नगर में स्थिति सबसे खराब रही। कई जगह कमर तक पानी पहुंच गया। छोला के शबरी नगर में करीब तीन फीट पानी भरा रहा। सेमरा में लगभग 200 मकानों के लोग जलभराव के कारण घरों में फंसे रहे। कोलार रोड, नारियलखेड़ा, करोंद, बैरसिया रोड, गांधी नगर, होशंगाबाद रोड, अयोध्या बायपास, रायसेन रोड और बैरागढ़ में भी जलभराव की स्थिति बनी रही।
सड़कों पर पानी भरने से यातायात भी प्रभावित हुआ। वीआईपी रोड पर पेड़ गिरने से कई घंटे जाम लगा रहा। भोपाल-बैरसिया मार्ग पर ईंटखेड़ी पुल के ऊपर पानी आने के कारण आवागमन रोकना पड़ा। कोलार क्षेत्र के कई अपार्टमेंट के बेसमेंट में पानी भर गया और दोपहिया वाहन भी फंस गए।
भारी बारिश के कारण शहर के प्रमुख जलाशयों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा। बड़े तालाब में दो फीट से अधिक, केरवा डैम में करीब तीन फीट तथा कलियासोत और कोलार डैम में करीब एक-एक फीट पानी बढ़ा। बड़ा तालाब, छोटा तालाब और शाहपुरा सहित शहर की झीलें जल व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रशासन ने संभाला मोर्चा और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई। नगर निगम, जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन दल सक्रिय रहे। बाढ़ नियंत्रण कक्ष शुरू किया गया तथा जरूरत के अनुसार डीवाटरिंग पंप, फायर ब्रिगेड और बचाव दल तैनात किए गए। शहर में करीब 495 नाले हैं, जिनमें 120 बड़े नाले शामिल हैं।
मंत्री विश्वास सारंग ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नालों की सफाई के निर्देश दिए। प्रशासन ने लोगों से नालों में पॉलीथीन और कचरा नहीं डालने की अपील की।
भारी बारिश ने एक बार फिर भोपाल में जलभराव की पुरानी समस्या को सामने ला दिया। निशातपुरा, छोला, करोंद और कोलार जैसे इलाके हर मानसून में इससे प्रभावित होते हैं। अतिक्रमण, नालों में कचरा और अपर्याप्त स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज को जलभराव की प्रमुख वजह माना जाता है।















