एक माननीय कल तक अपने साथ हुए खेल से खासे आक्रोशित और आक्रामक नजर आ रहे थे। लेकिन बदलते राजनीतिक समीकरणों की हवा चली तो सुर भी बदल गए। अब कह रहे हैं - पार्टी मेरी मां है, पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है, अब मुझे कुछ नहीं चाहिए।उनके शुभचिंतकों ने भी बड़े भोलेपन से पूछ लिया - लेकिन आपको देने वाला कौन था? सवाल छोटा था, जवाब शायद राजनीतिक मौसम देखकर देना था।















