भोपाल, 10 अगस्त।
जिस पिता ने मेहनत कर अपने चार बच्चों का पालन-पोषण किया, उनकी मौत के बाद बेटे-बेटियां अंतिम दर्शन तक करने नहीं पहुंचे। भोपाल के ‘अपना घर’ वृद्धाश्रम में रहने वाले 70 वर्षीय घनश्याम की 4 अगस्त को मृत्यु हो गई। आश्रम प्रबंधन ने दो दिन तक परिवार के आने का इंतजार किया, लेकिन कोई सदस्य नहीं पहुंचा। परिवार की ओर से आश्रम प्रबंधन से ही अंतिम संस्कार कराने और बाद में मृत्यु प्रमाण पत्र भेजने की मांग की जाती रही।
आश्रम संचालिका माधुरी मिश्रा के अनुसार घनश्याम मूल रूप से इंदौर के रहने वाले थे और साइकिल के टायर-ट्यूब का थोक कारोबार करते थे। पत्नी के निधन के बाद उन्होंने अकेले अपने चार बच्चों का पालन-पोषण किया। उनकी कमाई का अधिकांश हिस्सा बच्चों पर खर्च हुआ। जीवन के अंतिम करीब चार साल उन्होंने भोपाल के वृद्धाश्रम में बिताए।
मौत की सूचना मिलने पर आश्रम प्रबंधन ने परिवार से संपर्क किया। बेटी ने आने से इनकार करते हुए कहा कि पिता ने संपत्ति बेटों को दे दी थी और उसे कुछ नहीं मिला, इसलिए वह अंतिम संस्कार में क्यों आए। बेटों की ओर से भी पिता के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा गया कि उन्होंने उनके लिए किया ही क्या है। परिवार के सदस्य कभी ट्रेन का टिकट नहीं होने तो कभी बस में जगह नहीं मिलने की बात कहते रहे।
आश्रम में शव को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में प्रबंधन को दो दिन तक परेशानी का सामना करना पड़ा। आखिरकार पुलिस की मदद से घनश्याम का अंतिम संस्कार कराया गया। बाद में परिवार की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा गया। इस पर माधुरी मिश्रा ने कहा कि अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने वाले परिवार को प्रमाण पत्र के लिए आश्रम पर दबाव नहीं बनाना चाहिए।
माधुरी मिश्रा के अनुसार घनश्याम को परिवार का कोई सदस्य भोपाल लाकर छोड़ गया था। इसके बाद वे कई दिनों तक भटकते रहे और रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर भीख मांगकर जीवन बिताते रहे। बाद में सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से उन्हें वृद्धाश्रम पहुंचाया गया।
आश्रम संचालिका ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिनमें बच्चे बुजुर्ग माता-पिता को आश्रम में छोड़ने के बाद उनकी सुध नहीं लेते। कई बार माता-पिता के आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज भी बच्चे अपने पास रख लेते हैं, जिससे परिवार तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता कम होती जा रही है।














