दतिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा प्रत्याशी को हराकर सत्ता पक्ष को बड़ा झटका दिया। नतीजे आते ही जिला अध्यक्ष सहित पार्टी के कई पदाधिकारियों पर गाज गिर गई।अब हटाए गए पदाधिकारियों के बीच एक सवाल घूम रहा है - यदि हार की जिम्मेदारी हमारी थी तो प्रभारी बनाए गए सांसद, मंत्री, विधायक और अन्य पार्टी पदाधिकारियों की जिम्मेदारी कहां गई? यानी हार का हिसाब भी कुछ ऐसा कि बिल एक का और भुगतान कई लोगों का!















