भोपाल, 11 अगस्त।
राजधानी भोपाल में लगातार हुई तेज बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की गंभीर खामियां उजागर कर दीं। पिछले 24 घंटे में करीब 7 इंच बारिश दर्ज की गई, जो इस मानसून में अब तक की सबसे अधिक बारिश है। बारिश इतनी तेज रही कि पुराने शहर समेत 50 से अधिक इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। वीआईपी रोड से लेकर मिनाल क्षेत्र तक कई प्रमुख सड़कें पानी में डूब गईं। बैरसिया रोड पर भी आवागमन प्रभावित हुआ और कई स्थानों पर पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं।
बारिश का असर शहर के जलस्रोतों पर भी पड़ा है। बड़ा तालाब का जलस्तर करीब 2 से ढाई फीट बढ़ गया है। कोलांस नदी के कैचमेंट क्षेत्र में पांच फीट से अधिक पानी बहने के कारण तालाब में लगातार पानी पहुंच रहा है। कोलार, केरवा और कलियासोत डैम में भी पानी की आवक बढ़ी है और इनके जलस्तर में करीब एक से दो फीट तक वृद्धि हुई है।
लगातार बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने रात में अधिकारियों के साथ शहर और ग्रामीण क्षेत्रों का निरीक्षण किया। वे बाणगंगा क्षेत्र में पैदल पहुंचे और वहां की स्थिति देखी। क्षेत्र से नाला गुजरने के कारण यहां बारिश के बाद पानी भर गया था। कलेक्टर ने प्रभावित स्थानों का जायजा लेते हुए अधिकारियों को जलभराव की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने ईंटखेड़ी सड़क और आसपास के जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वर्षा के दौरान लोगों को होने वाली परेशानियों और सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों की जानकारी ली। ईंटखेड़ी पुल पर रात और बारिश के समय आवागमन को सुरक्षित रखने के लिए दोनों ओर रेडियम संकेतक और रोशनी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने आपदा मित्र और सिविल डिफेंस की टीम को भी लगातार सतर्क रहने को कहा।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पानी भरने वाले स्थानों पर लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जाए। निरीक्षण के दौरान एसडीएम विनोद सोनकिया सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। ईंटखेड़ी के पास बाणगंगा नदी में पानी बढ़ने और रास्ता बंद होने की स्थिति की भी जानकारी ली गई।
भोपाल में शनिवार रात से शुरू हुई बारिश सोमवार दोपहर तक रुक-रुककर जारी रही। कभी तेज तो कभी हल्की बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया। कोलार रोड, नारियलखेड़ा, शिव नगर, करोंद, बैरसिया रोड, गांधी नगर, होशंगाबाद रोड, अयोध्या बायपास, रायसेन रोड और बैरागढ़ सहित अनेक क्षेत्रों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मंत्री विश्वास सारंग भी प्रभावित इलाकों में पहुंचे और पानी की निकासी के इंतजाम बेहतर करने के निर्देश दिए।
बारिश ने ड्रेनेज और सीवेज सिस्टम पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम हर साल नाला सफाई, सीवेज और जल निकासी व्यवस्था पर 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है। इसके बावजूद पहली ही तेज बारिश में कई इलाकों के नाले पानी से भर गए और निकासी बाधित हो गई। कई जगह पानी निकलने का रास्ता नहीं बचा, जिससे घरों के आसपास जलभराव हो गया।
सेमरा सहित कई इलाकों में हालात बेहद खराब रहे। यहां 200 से अधिक घरों के आसपास पानी जमा हो गया और हजारों लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। लंबे समय बाद हुई तेज बारिश ने शहर की मौजूदा नाला सफाई और जल निकासी व्यवस्था की स्थिति सामने ला दी।
अयोध्या बायपास क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्य ने भी आसपास के रहवासियों की परेशानी बढ़ा दी। 10 लेन अयोध्या बायपास के निर्माण के दौरान आसपास जमा भराव वाली मिट्टी नहीं हटाई गई। इससे बारिश का पानी सड़क किनारे स्थित कॉलोनियों की ओर चला गया। पाम सिटी फेस-2 में कई घरों के आसपास तीन से चार फीट तक पानी भर गया।
जलभराव इतना अधिक था कि घरों के भूतल पर रखा सामान भी पानी की चपेट में आकर खराब हो गया। इससे प्रभावित रहवासियों में नाराजगी देखने को मिली। लगातार बारिश के बीच जल निकासी नहीं होने से क्षेत्र में लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं।















