मलाईदार विभाग में पदस्थ बड़े साहब का एक बड़ा प्रोजेक्ट इन दिनों चर्चा में है। साहब की खासियत बताई जाती है कि वे अपने नाम से कम और दूसरों के नाम पर ज्यादा काम करना पसंद करते हैं। जिस सहयोगी के नाम पर साहब का निवेश और बड़े-बड़े काम चल रहे थे, उससे अब रिश्तों में खटास पैदा हो गई है।
मुश्किल यह है कि सहयोगी को छोड़ना आसान नहीं और उसे साधे रखना भी चुनौती बन गया है। अब साहब के सामने बड़ा सवाल है - सहयोगी को साधें या विभाग को संभालें?















